• July 30, 2026 8:17 pm

    न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है? MSP कैसे तय किया जाता है? (2026-27)

    MSP 2026

    नमस्कार साथियों,आज हम आपको बताएंगे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP) क्या होता है, इसे कौन तय करता है, कैसे निकाला जाता है और वर्ष 2026-27 के लिए प्रमुख फसलों का MSP कितना घोषित किया गया है। यदि आप कृषि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या MSP के बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी रहेगा।

    MSP (Minimum Support Price) क्या है?

    न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह न्यूनतम कीमत है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसल खरीदने की गारंटी देती है। यदि बाजार में फसल का भाव MSP से कम हो जाता है, तो सरकार MSP पर खरीद कर किसानों को नुकसान से बचाती है।

    MSP की शुरुआत कब हुई?

    • 1965 में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Agricultural Prices Commission – APC) का गठन किया गया।
    • 1966 में पहली बार MSP व्यवस्था लागू की गई।
    • 1985 में APC का नाम बदलकर Commission for Agricultural Costs and Prices (CACP) कर दिया गया।

    CACP क्या है?

    CACP (Commission for Agricultural Costs and Prices) एक विशेषज्ञ आयोग है जो विभिन्न फसलों की उत्पादन लागत का अध्ययन करके सरकार को MSP की सिफारिश करता है।

    ध्यान दें कि CACP केवल सिफारिश करता है, अंतिम MSP की घोषणा भारत सरकार (कैबिनेट) करती है।

    MSP कैसे तय किया जाता है?

    सरकार का उद्देश्य किसानों को उत्पादन लागत पर कम से कम 50% लाभ देना है।

    सरल सूत्र:

    MSP ≈ उत्पादन लागत (A2+FL) × 1.5

    अर्थात यदि किसी फसल की लागत ₹100 है, तो MSP लगभग ₹150 रखा जाता है।

    MSP निर्धारित करने में किन लागतों को शामिल किया जाता है?

    1. A2 Cost (Paid Out Cost)

    इसमें किसान द्वारा नकद या प्रत्यक्ष रूप से किए गए खर्च शामिल होते हैं, जैसे—

    • बीज
    • उर्वरक
    • कीटनाशक
    • सिंचाई
    • मजदूरी
    • डीजल/ईंधन
    • मशीनरी किराया
    • अन्य कृषि खर्च

    2. A2 + FL

    A2 लागत + परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए श्रम (Family Labour) का अनुमानित मूल्य।

    MSP की गणना का मुख्य आधार A2+FL माना जाता है।

    3. C2 Cost

    यह सबसे व्यापक लागत होती है।

    इसमें शामिल हैं—

    • A2
    • परिवार का श्रम (FL)
    • भूमि का अनुमानित किराया
    • स्थायी पूंजी पर ब्याज

    सूत्र

    C2 = A2 + FL + भूमि का किराया + पूंजी पर ब्याज

    MSP में लाभ (Margin) कैसे निकाला जाता है?

    सूत्र

    
    \text{Margin (\%)}=
    \frac{\text{MSP}-\text{Cost of Cultivation}}
    {\text{Cost of Cultivation}}
    \times100
    

    उदाहरण

    धान (सामान्य)

    • लागत (A2+FL) = ₹1627 प्रति क्विंटल
    • MSP = ₹2441 प्रति क्विंटल

    लाभ = 2441 − 1627 = ₹814 प्रति क्विंटल

    खरीफ फसलों का MSP (2026-27)

    फसलMSP (₹/क्विंटल)
    धान (Common)2441
    धान (Grade A)2461
    ज्वार (Hybrid)4023
    बाजरा2900
    मक्का2410
    अरहर8450
    मूंग8780
    सोयाबीन (Yellow)5708
    तिल10346
    कपास8267

    2025-26 की तुलना में बढ़ोतरी

    फसलबढ़ोतरी
    धान (Common)₹72
    मूंग₹12
    सोयाबीन₹380
    कपास₹557

    सबसे अधिक MSP वृद्धि (Absolute Increase)

    1. सूरजमुखी बीज – ₹620
    2. कपास – ₹557
    3. रामतिल (Nigerseed) – ₹515
    4. तिल – ₹500

    लागत पर सबसे अधिक लाभ (Margin)

    • मूंग – 61%
    • बाजरा – 56%
    • मक्का – 56%
    • ज्वार – 54%
    • उड़द – 51%

    MSP क्यों जरूरी है?

    • किसानों को न्यूनतम आय की गारंटी मिलती है।
    • बाजार में कीमत गिरने पर सुरक्षा मिलती है।
    • कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
    • खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।
    • किसानों की आय स्थिर रखने में मदद मिलती है।

    परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

    • 1965 – APC (अब CACP) का गठन।
    • 1966 – MSP व्यवस्था लागू।
    • 1985 – APC का नाम बदलकर CACP किया गया।
    • CACP MSP की सिफारिश करता है।
    • केंद्र सरकार MSP की अंतिम घोषणा करती है।
    • MSP का आधार A2+FL लागत पर कम से कम 50% लाभ है।

    निष्कर्ष

    उम्मीद करता हूं कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आपका कोई सवाल या सुझाव है तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं। यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Translate »