आज कृषि के क्षेत्र में हम कई ऐसे व्यक्तियों के बारे में पढ़ते हैं, जो कृषि के क्षेत्र को उन्नति के मार्ग पर ले जा रहे हैं। उन्हीं में से एक ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने भारत के किसानों की किस्मत और देश की थाली—दोनों की तस्वीर बदल दी—डॉ. रामपाल सिंह परोदा!
🌱 शुरुआती सफर और शिक्षा
28 अगस्त 1942 को राजस्थान के अजमेर में जन्मे डॉ. रामपाल सिंह परोदा ने उदयपुर से B.Sc. Agriculture की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित कृषि संस्थान IARI, नई दिल्ली से M.Sc. और Ph.D. की डिग्रियां हासिल कीं।
कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान
ICAR के महानिदेशक और भारत सरकार के सचिव के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान और विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने नेशनल जीन बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहाँ देश की महत्वपूर्ण फसलों के आनुवंशिक संसाधनों और बीजों को सुरक्षित रखने का कार्य किया जाता है।
उन्होंने चारे और फसलों की बेहतर किस्मों तथा कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिली।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान
डॉ. परोदा ने भारतीय कृषि अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने APAARI और TAAS जैसी संस्थाओं के गठन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनका उद्देश्य केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि एशिया और दुनिया के कृषि वैज्ञानिकों को एक-दूसरे से जोड़कर कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक और शोध को आगे बढ़ाना भी था।
सर्वोच्च सम्मान
कृषि विज्ञान और देश की सेवा में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (1988) और पद्म भूषण (1998) जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया।
एक वैज्ञानिक, जिसने बदली कृषि की दिशा
डॉ. रामपाल सिंह परोदा का जीवन हमें यह संदेश देता है कि अगर नियत सही हो और सोच वैज्ञानिक हो, तो एक इंसान पूरे देश के भविष्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कृषि केवल खेत में फसल उगाने का नाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिकों का वर्षों का शोध, किसानों की मेहनत और देश की वैज्ञानिक सोच होती है।
निष्कर्ष
डॉ. परोदा का जीवन इसी वैज्ञानिक सोच और कृषि के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
धन्यवाद!
खेती अब सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रही है। नई तकनीक, ड्रोन, डिजिटल मंडी, मिट्टी की जांच, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं ने किसानों के काम करने के तरीके को बदलना शुरू कर दिया है।खेत और पशु-फ़ार्महमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको समझ में आ गई होगी।

