• September 14, 2026 11:55 am

    बद्री गाय के संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि, वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक से रचा नया इतिहास

    आज कृषि के क्षेत्र में नए-नए आविष्कार, नई तकनीक और नई-नई उपलब्धियाँ देखने को मिल रही हैं। कृषि के क्षेत्र में नए छात्र और वैज्ञानिक आगे आकर नए-नए प्रयोग कर रहे हैं और कृषि तथा पशुपालन के क्षेत्र को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

    इसी क्रम में 11 सितंबर 2026 को टेरी अनुसंधान, करनाल (हरियाणा) के वैज्ञानिकों और पंतनगर के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक महत्वपूर्ण प्रयोग किया, जो उत्तराखंड की बद्री गाय के संरक्षण और उसकी नस्ल को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

    पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बद्री गाय के भ्रूण को OPU-IVF (Ovum Pick-Up and In Vitro Fertilization) यानी अल्ट्रासाउंड-गाइडेड ओवम पिक-अप और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक के माध्यम से प्रयोगशाला में तैयार किया। इसके बाद इस भ्रूण को एक सरोगेट साहीवाल गाय में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया।

    OPU (Ovum Pick-Up) यानी अंडाणु निकालने की तकनीक।
    इस तकनीक में अल्ट्रासाउंड की मदद से गाय की अंडाशय (Ovary) से परिपक्व या विकसित हो रहे अंडाणु (Oocytes) को एक विशेष सुई के माध्यम से निकाला जाता है। इसके बाद इन अंडाणुओं को प्रयोगशाला में शुक्राणु के साथ निषेचित करके भ्रूण तैयार किया जाता है। इसी प्रक्रिया को आगे IVF कहा जाता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 11 सितंबर 2026 को साहीवाल सरोगेट गाय ने बद्री गाय के बछड़े को जन्म दिया।

    यह उपलब्धि उत्तराखंड की प्रसिद्ध बद्री गाय के संरक्षण, संवर्धन और उसकी आनुवंशिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आधुनिक प्रजनन तकनीक का इस प्रकार उपयोग देशी पशु नस्लों के संरक्षण के लिए भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

    निष्कर्ष

    उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा बताएगी जानकारी आपको समझ में आ गई होगी यदि कोई सवाल है तो कमेंट करके बताएं अधिक जानकारी के लिए ईमेल करें ईमेल पता नीचे दिया गया है हमने ब्लॉगिंग से संबंधित आर्टिकल और भी लिखे जिन्हें आप पढ़ सकते हैं
    Mysmarttips.in@gmail.com

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    Translate »