भारत में कृषि केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि से जुड़े कई अन्य क्षेत्र भी जुड़े हुए हैं। वर्ष 2026 में जारी भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उत्पादन, किसान सहायता, डिजिटल कृषि, बाजार, भंडारण और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
कृषि अर्थव्यवस्था में वृद्धि

कृषि और संबद्ध क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (GVA) वर्ष 2014-15 में ₹20.94 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में अनुमानित रूप से बढ़कर ₹52.08 लाख करोड़ हो गया।
वहीं कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट आवंटन 2013-14 में ₹27,663 करोड़ था, जो 2026-27 में बढ़कर ₹1,40,528.78 करोड़ हो गया।
खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी वृद्धि
भारत में खाद्यान्न उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2013-14 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 265.05 मिलियन टन था, जो 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार बढ़कर 376.56 मिलियन टन हो गया।
2025-26 में बागवानी उत्पादन लगभग 377.78 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वहीं तिलहन उत्पादन 2014-15 के 27.51 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 43.06 मिलियन टन होने का अनुमान है।
2025-26 का 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन अब तक का सबसे अधिक अनुमानित उत्पादन है।
किसानों को सीधे आर्थिक सहायता
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी PM-KISAN के तहत 23 किस्तों में किसानों के बैंक खातों में ₹4.47 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे भेजी जा चुकी है।
23वीं किस्त में 9.49 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला और ₹18,984 करोड़ से अधिक राशि जारी की गई।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY किसानों को प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से फसल खराब होने पर बीमा सुरक्षा प्रदान करती है।
2016-17 में योजना शुरू होने के बाद से 92.46 करोड़ से अधिक किसान आवेदन बीमित किए गए हैं। दिसंबर 2025 तक लगभग ₹1.96 लाख करोड़ के दावों का भुगतान किया गया, जिससे लगभग 24.31 करोड़ किसानों को लाभ मिला।
MSP और सरकारी खरीद
MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों को उनकी उपज के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध कराने की सरकारी व्यवस्था है।
2004-2014 के दौरान कुल सरकारी खरीद 698.7 मिलियन टन थी, जो 2014-2026 के दौरान बढ़कर 1,229.2 मिलियन टन हो गई।
इसी अवधि में MSP के तहत खरीद का कुल मूल्य ₹26.32 लाख करोड़ रहा। यह आंकड़ा फरवरी 2026 तक का है।
2026-27 के लिए:
- धान Grade-A का MSP — ₹2,461 प्रति क्विंटल
- गेहूं का MSP — ₹2,585 प्रति क्विंटल
2014-15 में दोनों का MSP ₹1,400 प्रति क्विंटल था।
किसान क्रेडिट कार्ड
किसानों को खेती के लिए ऋण उपलब्ध कराने में किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3 अगस्त 2026 तक देश में 7.28 करोड़ KCC खाते चालू थे। इन खातों के तहत बकाया राशि लगभग ₹10.08 लाख करोड़ थी।
प्राकृतिक और टिकाऊ खेती
कृषि में मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
जुलाई 2026 तक 26.09 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके थे।
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत 2025-26 में 18,893 क्लस्टर बनाए गए। इन क्लस्टरों में 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र और 20.93 लाख किसान शामिल थे।
इसके अलावा प्राकृतिक खेती के बारे में 33.89 लाख किसानों को जागरूक किया गया और 22.47 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती प्रमाणन प्रणाली के तहत पंजीकृत हुए।
किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ना
आज खेती में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
3 अगस्त 2026 तक देश में 10.31 करोड़ से अधिक Farmer IDs बनाए जा चुके थे।
रबी 2025-26 के दौरान डिजिटल फसल सर्वेक्षण में 648 जिलों के 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों को शामिल किया गया।
Farmer ID के माध्यम से किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, कृषि सेवाओं और दूसरी सुविधाओं से जोड़ना आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषि में AI का इस्तेमाल
कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।
National Pest Surveillance System (NPSS) का इस्तेमाल जुलाई 2026 तक 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा था। यह 73 फसलों और 436 कीटों से संबंधित सहायता प्रदान कर रहा था।
वहीं BharatVistaar प्लेटफॉर्म ने 3 लाख से अधिक किसानों को सेवा दी और 72 लाख से अधिक किसान प्रश्नों का समाधान किया।
e-NAM से किसानों को बाजार से जोड़ना
e-NAM यानी राष्ट्रीय कृषि बाजार किसानों को ऑनलाइन कृषि बाजार से जोड़ने की सुविधा देता है।
जून 2026 तक:
- 1,656 मंडियां e-NAM से जुड़ चुकी थीं।
- 1.89 करोड़ किसान पंजीकृत थे।
- 2.78 लाख व्यापारी पंजीकृत थे।
FPO और PACS को बढ़ावा
किसानों को समूह बनाकर बाजार और दूसरी सुविधाओं से जोड़ने के लिए FPO यानी Farmer Producer Organisation को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जुलाई 2026 तक देश में 10,000 FPO पंजीकृत हो चुके थे।
वहीं 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 79,630 PACS के कंप्यूटरीकरण को मंजूरी दी गई थी। 5 अगस्त 2026 तक 63,707 PACS राष्ट्रीय ERP आधारित सॉफ्टवेयर पर जोड़े जा चुके थे।
कृषि भंडारण और बुनियादी ढांचा
किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं की जरूरत होती है।
जुलाई 2026 तक पिछले दस वर्षों में 12,353 भंडारण अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इन परियोजनाओं की कुल भंडारण क्षमता 369.18 लाख मीट्रिक टन थी।
कृषि अवसंरचना कोष के तहत 18,893 गोदामों, 3,110 कोल्ड स्टोरेज/कोल्ड चेन परियोजनाओं और 2,105 प्रसंस्करण इकाइयों को ब्याज सब्सिडी सहायता दी गई।
कृषि निर्यात में वृद्धि
भारत के कृषि निर्यात में भी वृद्धि हुई है।
2014-15 में कृषि निर्यात का मूल्य 32.08 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 54.70 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह लगभग 70.5 प्रतिशत की वृद्धि है।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विस्तार
किसान की फसल खेत से बाजार तक पहुंचने के बाद अगर उसका प्रसंस्करण किया जाए तो उससे अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। इसी वजह से खाद्य प्रसंस्करण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय का बजट आवंटन 2014-15 में ₹785.86 करोड़ था, जो 2026-27 में बढ़कर ₹4,064 करोड़ हो गया।
PM Kisan Sampada Yojana के तहत जून 2026 तक 1,256 परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं या चालू थीं। इनसे लगभग 37.76 लाख किसानों को लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।
दूध उत्पादन में भारत की स्थिति
कृषि के साथ पशुपालन और डेयरी भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारत दूध उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है और वैश्विक दूध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत योगदान देता है।
2024-25 में भारत का दूध उत्पादन 248 मिलियन टन रहा, जबकि 2014-15 में यह 146.31 मिलियन टन था। इस अवधि में दूध उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत वृद्धि हुई।
2024-25 में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन रही।
अंडा और मांस उत्पादन
भारत में अंडा उत्पादन भी बढ़ा है।
2014-15 में देश में 78.48 अरब अंडे पैदा हुए थे, जो 2024-25 में बढ़कर 149.11 अरब हो गए।
यानी इस अवधि में अंडा उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत वृद्धि हुई।
मांस उत्पादन 2014-15 के 6.69 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 10.50 मिलियन टन हो गया।
मत्स्य पालन में वृद्धि
मत्स्य पालन भी कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2013-14 में भारत का मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया।
समुद्री खाद्य निर्यात का मूल्य भी 2013-14 के 3.64 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 8.46 बिलियन डॉलर हो गया।
निष्कर्ष
इन आंकड़ों को आसान भाषा में समझें तो भारतीय कृषि में बदलाव केवल गेहूं और धान के उत्पादन तक सीमित नहीं है।
कृषि के साथ किसान सहायता, फसल बीमा, MSP, कृषि ऋण, डिजिटल खेती, AI, e-NAM, FPO, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण, प्राकृतिक खेती, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में भी काम हो रहा है।
इसलिए भारतीय कृषि को समझने के लिए केवल फसल उत्पादन नहीं, बल्कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को एक साथ समझना जरूरी है।
यह जानकारी भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा 12 अगस्त 2026 को जारी “भारतीय कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का नया युग” शीर्षक वाली आधिकारिक जानकारी पर आधारित है।
2024-25 में बढ़कर 149.11 अरब हो गए।
2024-25 में बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया

