नमस्कार साथियों,जब बात आती है चावल की, तो भारत में लगभग 6,000 से अधिक चावल की किस्में पाई जाती हैं। हर क्षेत्र और जलवायु के हिसाब से चावल की अलग-अलग किस्में प्रसिद्ध हैं।
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में काला चावल प्रसिद्ध है, वहीं उत्तराखंड में पाया जाने वाला लाल चावल भी अपनी अलग पहचान रखता है।

साथियों, आजकल हम जिस सामान्य सफेद चावल का सेवन करते हैं, वह अक्सर पॉलिश किया हुआ चावल होता है। सामान्य चावल में लगभग 6 से 7 प्रतिशत प्रोटीन पाया जा सकता है। चावल को जितना अधिक पॉलिश किया जाता है, उसकी बाहरी परतों के साथ कुछ पोषक तत्व भी कम हो सकते हैं।
वहीं लाल चावल, जो उत्तराखंड के उत्तरकाशी क्षेत्र में प्रसिद्ध है, अपनी प्राकृतिक विशेषताओं के लिए जाना जाता है। इसकी खेती में पारंपरिक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का उपयोग किया जाता है और इसे कम रासायनिक इनपुट वाली खेती से जोड़ा जाता है।
उत्तरकाशी का लाल चावल अपनी विशेष पहचान के कारण काफी प्रसिद्ध है। इसे GI Tag भी मिला हुआ है और इसे एक जिला एक उत्पाद (ODOP) की श्रेणी में भी शामिल किया गया है।
लाल चावल की खासियत यह है कि यह सामान्य पॉलिश किए हुए सफेद चावल की तरह अधिक पॉलिश नहीं किया जाता। इसलिए इसमें चावल की बाहरी परतों में मौजूद कई पोषक तत्व बने रह सकते हैं। इसमें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं।
कहा जाता है कि लाल चावल उन लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकता है जो अपने भोजन में अधिक पौष्टिक और कम प्रसंस्कृत अनाज को शामिल करना चाहते हैं। हालांकि, किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या, जैसे ब्लड शुगर, में इसे दवा या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष
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