नमस्कार साथियों,आज हम आपको उत्तराखंड के एक महत्वपूर्ण कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के बारे में बताने वाले हैं।
यह विश्वविद्यालय भरसार, पौड़ी गढ़वाल में स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 2011 में उत्तराखंड विधानसभा के अधिनियम के तहत हुई थी। इससे पहले यहां के कुछ संस्थान गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से जुड़े हुए थे। वर्ष 2011 में अलग विश्वविद्यालय बनने के बाद इन संस्थानों को इस विश्वविद्यालय के अधीन कर दिया गया।

विश्वविद्यालय के प्रमुख संस्थान
इस विश्वविद्यालय के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण संस्थान आते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
1. औद्यानिकी महाविद्यालय (College of Horticulture) – भरसार, पौड़ी गढ़वाल
2. वानिकी महाविद्यालय (College of Forestry) – रानीचौरी, टिहरी गढ़वाल
3. पर्वतीय कृषि महाविद्यालय (College of Hill Agriculture) – चिरबटिया, रुद्रप्रयाग
4. खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (Institute of Food Science and Technology) – माजरीग्रांट, देहरादून
इसके अलावा विश्वविद्यालय के अंतर्गत औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित संस्थान भी संचालित हैं।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कौन थे?
अब बात करते हैं कि इस विश्वविद्यालय का नाम वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर क्यों रखा गया।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को पेशावर कांड, 1930 के महानायक के रूप में जाना जाता है।
वर्ष 1930 में पेशावर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे निहत्थे लोगों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया था। उस समय चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया।
इस साहसिक कदम के कारण ब्रिटिश सरकार ने उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की। उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।

इसी महान स्वतंत्रता सेनानी और उनके साहस को सम्मान देने के लिए विश्वविद्यालय का नाम वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर रखा गया।
उत्तराखंड की कृषि में विश्वविद्यालय की भूमिका
उत्तराखंड का अधिकांश क्षेत्र पर्वतीय है और यहां की कृषि मैदानी क्षेत्रों की कृषि से काफी अलग है। ऐसे में पर्वतीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कृषि तकनीक, औद्यानिकी, वानिकी, खाद्य प्रसंस्करण और औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल छात्रों को शिक्षा देना ही नहीं है, बल्कि पर्वतीय कृषि को मजबूत करना, किसानों तक नई तकनीक पहुंचाना और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि एवं बागवानी के विकास को बढ़ावा देना भी है।
तो साथियों, यह थी जानकारी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के बारे में।
आपको यह जानकारी कैसी लगी, कमेंट करके अवश्य बताएं।
धन्यवाद। जय हिंद! 🇮🇳

