नमस्कार साथियों,
गंगा नदी को बचाने के लिए भारत में कई महापुरुषों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन्हीं में एक बड़ा नाम है प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल, जिन्हें बाद में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से जाना गया।
जी.डी. अग्रवाल आईआईटी कानपुर में सिविल एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रहे थे। बाद में उन्होंने संन्यास का मार्ग अपनाया और अपना जीवन गंगा की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने गंगा के प्रदूषण, अवैध खनन और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करने वाली परियोजनाओं के खिलाफ कई बार आवाज उठाई और अनशन किए। गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिए जाने के दौर में भी उनके आंदोलन और दबाव की महत्वपूर्ण भूमिका रही, हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि राष्ट्रीय नदी का दर्जा केवल उन्हीं के कारण मिला।
2018 का वह ऐतिहासिक अनशन
साल 2018 में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने 22 जून से गंगा की रक्षा के लिए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। उनकी प्रमुख मांगों में गंगा को प्रदूषण से बचाना, नदी के अविरल प्रवाह को बनाए रखना, अवैध खनन रोकना और गंगा की सहायक नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर कड़े कदम उठाना शामिल था।
लगातार 111 दिनों तक चले इस अनशन के बाद 11 अक्टूबर 2018 को ऋषिकेश स्थित एम्स में उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 86 वर्ष थी।
उनका संघर्ष हमें यह सवाल जरूर सोचने पर मजबूर करता है कि जिस गंगा को हम केवल एक नदी नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा मानते हैं, उसकी स्वच्छता और अविरलता की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
निष्कर्ष
जी.डी. अग्रवाल का जीवन गंगा संरक्षण के लिए समर्पित एक ऐसी कहानी है, जिसे हमें याद रखना चाहिए।
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