खेत बचाओ अभियान
भारत सरकार 1 जून से 30 जून तक एक अभियान चला रही है। इस अभियान का नाम है खेत बचाओ अभियान।
क्यों शुरू किया गया यह अभियान?
आज आप सभी जानते हैं कि जब हम खेत में कुछ बोते हैं तो हम उस खेत की मिट्टी को चेक नहीं करते बल्कि उसमें मनचाहा फर्टिलाइजर डालते रहते हैं। बार-बार यूरिया का प्रयोग और अत्यधिक खाद का प्रयोग करने से हमारी भूमि बंजर हो रही है। इसी को बचाने के लिए और किसानों को यह बताने के लिए कि उनकी भूमि को वास्तव में क्या चाहिए, भारत सरकार खेत बचाओ अभियान शुरू कर रही है।
लैब टू लैंड प्रोजेक्ट की तर्ज पर होगा काम
1979 में एक अभियान शुरू हुआ था लैब टू लैंड प्रोजेक्ट। इस प्रोजेक्ट में वैज्ञानिक आपके घर-घर आए थे और लैब से जानकारी आपके खेतों तक पहुंची थी। ठीक उसी प्रकार इस अभियान में भी वैज्ञानिक आपके खेतों तक आएंगे, कृषि से जुड़े लोग आपके खेतों तक आएंगे, आपकी मिट्टी की जांच करेंगे और बताएंगे कि मिट्टी में आपको क्या-क्या डालना है, कितना डालना है और आप प्राकृतिक कृषि की ओर कैसे बढ़ सकते हैं।
मिट्टी की जांच कर दी जाएगी सही सलाह

क्योंकि हम देखते हैं कि किसान अधिकतर बिना मिट्टी की जांच के उर्वरकों का प्रयोग कर देते हैं। खाद का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है। सरकार भी किसानों को उर्वरकों पर सब्सिडी उपलब्ध कराती है, लेकिन अत्यधिक खाद के प्रयोग से भूमि की उर्वरक क्षमता प्रभावित हो रही है और कई स्थानों पर मिट्टी की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।
किसानों से जुड़ने की अपील
इसलिए भारत सरकार खेत बचाओ अभियान 1 जून से 30 जून तक शुरू कर रही है। इस अभियान के माध्यम से किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक कृषि के बारे में जागरूक किया जाएगा। आप सभी से अनुरोध है कि इस अभियान से जुड़कर अपने खेत को बंजर होने से बचाइए और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहयोग कीजिए।
निष्कर्ष
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