• July 29, 2026 2:08 am

    क्या केवल प्लेसमेंट प्रतिशत दिखाना पर्याप्त है? छात्रों को पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है

    ByHimanshu Papnai

    Jul 28, 2026

    क्या केवल प्लेसमेंट प्रतिशत दिखाना पर्याप्त है? छात्रों को पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है”80% प्लेसमेंट”, “90% प्लेसमेंट”, “100% प्लेसमेंट” — आजकल निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विज्ञापनों में ऐसे दावे आम हो गए हैं। इन्हीं दावों को देखकर हजारों छात्र और अभिभावक प्रवेश ले लेते हैं, लेकिन क्या उन्हें पूरी सच्चाई बताई जाती है?क्या सिर्फ प्रतिशत बताना पर्याप्त है?मान लीजिए किसी विश्वविद्यालय में किसी कोर्स में 200 छात्रों ने प्रवेश लिया। चार साल बाद 150 छात्र अंतिम वर्ष तक पहुँचे, उनमें से 100 छात्र प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल हुए और 80 छात्रों को नौकरी मिली। तब संस्थान 80% प्लेसमेंट बता सकता है, जबकि कुल प्रवेश लेने वाले 200 छात्रों में से नौकरी पाने वाले केवल 80 छात्र हैं। यदि पूरी जानकारी न दी जाए तो छात्र वास्तविक स्थिति समझ ही नहीं पाते।«

    यही कारण है कि केवल प्रतिशत नहीं, बल्कि उसके पीछे का पूरा डेटा सार्वजनिक होना चाहिए।

    छात्रों को कौन-कौन सी जानकारी मिलनी चाहिए?- कोर्स में कुल प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या

    ।- पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों की संख्या

    ।- प्लेसमेंट के लिए पात्र (Eligible) छात्रों की संख्या

    ।- वास्तव में नौकरी पाने वाले छात्रों की संख्या।- किन कंपनियों में प्लेसमेंट हुआ

    ।- औसत (Average), न्यूनतम (Lowest) और अधिकतम (Highest) वेतन

    ।- कितने छात्रों ने उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएँ या स्वयं का व्यवसाय चुना।

    पारदर्शिता क्यों ज़रूरी है?

    आज कई संस्थान केवल आकर्षक विज्ञापन दिखाते हैं। छात्र और अभिभावक वास्तविक आँकड़ों के बजाय केवल प्रतिशत देखकर निर्णय ले लेते हैं। यदि सभी विश्वविद्यालय कोर्स-वार प्लेसमेंट रिपोर्ट सार्वजनिक करें, तो छात्रों को सही जानकारी मिलेगी और वे सोच-समझकर प्रवेश ले सकेंगे।«शिक्षा एक सेवा है, केवल व्यवसाय नहीं। इसलिए पारदर्शिता हर संस्थान की जिम्मेदारी होनी चाहिए।»एडमिशन पर कमीशन का बढ़ता चलनकुछ संस्थानों में अधिक से अधिक एडमिशन कराने के लिए रेफरल या कमीशन आधारित व्यवस्था भी देखने को मिलती है, जहाँ किसी नए छात्र का प्रवेश कराने पर आर्थिक लाभ दिया जाता है। यदि ऐसा किया जाता है तो इसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से सार्वजनिक होनी चाहिए। शिक्षा में गुणवत्ता और ईमानदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि केवल प्रवेश संख्या बढ़ाने को।

    हमारी अपील

    हम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं से आग्रह करते हैं कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कोर्स-वार प्लेसमेंट डेटा सार्वजनिक करना अनिवार्य किया जाए।हर संस्थान को यह बताना चाहिए:- कुल छात्र कितने थे?- कितने प्लेसमेंट के लिए पात्र थे?- कितनों को नौकरी मिली?- प्लेसमेंट प्रतिशत किस आधार पर निकाला गया?- औसत और उच्चतम वेतन कितना रहा?

    निष्कर्ष

    छात्रों का भविष्य केवल विज्ञापनों के आधार पर तय नहीं होना चाहिए। सही, स्पष्ट और सत्यापित जानकारी हर छात्र का अधिकार है। जब प्लेसमेंट से जुड़े वास्तविक आँकड़े सार्वजनिक होंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्र अपने भविष्य के लिए बेहतर निर्णय ले पाएँगे।

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