भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के तहत की गई थी और इसने वर्ष 1935 में अपना कार्य शुरू किया। भारत के आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने और देश की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक लगातार कार्य कर रहा है।
आज देश में महंगाई को नियंत्रित करने, बाजार में मुद्रा के प्रवाह को बनाए रखने तथा विभिन्न योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में RBI की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश की आर्थिक स्थिति कैसी है और वित्तीय व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ रही है, इसकी निगरानी भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाती है।
हाल ही में आपको एक जानकारी मिली होगी कि भारतीय रिजर्व बैंक प्लास्टिक के नोट बाजार में लाने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो बाजार में क्या बदलाव आएंगे और आने वाले समय में भारतीय मुद्रा व्यवस्था किस नई दिशा में आगे बढ़ेगी, इसके बारे में आज हम आपको बताएंगे।
प्लास्टिक के नोट छापने की तैयारी
हालिया खबरों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक प्लास्टिक के नोट छापने पर विचार कर रहा है। यह कार्य पायलट प्रोजेक्ट के तहत किया जा सकता है। पायलट प्रोजेक्ट का मतलब होता है कि किसी नई योजना को पहले किसी एक क्षेत्र या सीमित क्षेत्र में लागू किया जाता है। यदि वह वहां सफल रहती है, तो बाद में उसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है

इससे पहले भी प्लास्टिक के नोटों को लेकर विचार किया गया था, लेकिन अब एक बार फिर इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि प्लास्टिक के नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक चलेंगे। ये जल्दी खराब नहीं होंगे, पानी और नमी से कम प्रभावित होंगे तथा इनकी टिकाऊ क्षमता अधिक होगी।
यदि यह योजना सफल रहती है, तो भविष्य में भारतीय मुद्रा व्यवस्था अधिक आधुनिक और सुरक्षित बन सकती है।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको समझ में आ गई होगी। यदि इस विषय से जुड़ा आपका कोई सवाल या सुझाव है, तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

