जिन लोगों के पास इसका लाइसेंस है, उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपना लाइसेंस जमा कराना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही राज्यों को भी बाजारों में जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल यह केवल ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है और सरकार ने 30 जुलाई तक कंपनियों और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं।
पैराक्वाट का इतिहास
बहुत कम लोग जानते हैं कि शुरुआत में पैराक्वाट का उपयोग खेती के लिए नहीं किया जाता था। वर्ष 1882 में ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इसे विकसित किया था। उस समय इसका उपयोग कपड़ों को रंगने के लिए किया जाता था।
बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि यह पौधों को बहुत तेजी से सुखा देता है। इसके बाद वर्ष 1961 में इसका बड़े पैमाने पर उपयोग शुरू हुआ और 1962 में इसे पहली बार बाजार में उतारा गया।
यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
पैराक्वाट डाइक्लोराइड अत्यधिक विषैला रसायन माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति गलती से या जानबूझकर इसका सेवन कर ले, तो उसे बचाना बहुत कठिन हो सकता है। यही कारण है कि कई देशों ने इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको पसंद आई होगी और पैराक्वाट डाइक्लोराइड के बारे में आपकी जानकारी बढ़ी होगी। यदि आपको यह लेख उपयोगी लगा हो, तो इसे अपने दोस्तों और किसानों के साथ जरूर साझा करें। आपका कोई सुझाव या सवाल हो तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

