नमस्कार साथियों,जैसा कि आजकल आपको न्यूज़ के माध्यम से जानकारी मिल रही है कि सोनम वांगचुक दिल्ली में धरने पर बैठे हुए हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके पिता भी एक बार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे?
अगर बात करें सोनम वांगचुक की, तो वे एक शिक्षक, इंजीनियर, नवाचारकर्ता और समाजसेवी हैं। इन्होंने ऐसे कई काम किए हैं जिन्हें आज भी याद किया जाता है। जो बच्चे पढ़ाई में फेल हो जाते थे

या अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाते थे, उनके लिए इन्होंने SECMOL की स्थापना की। यहां बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल नॉलेज भी दी जाती है।
अगर उनके पिता की बात करें तो सोनम वांग्याल (Sonam Wangyal) एक राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता थे। वे जम्मू-कश्मीर सरकार में 1975 में कैबिनेट मंत्री और विधायक (MLA/MLC) रह चुके थे। अपनी ही पार्टी के खिलाफ भी उन्होंने आवाज उठाई थी।
1984 में लद्दाख को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने के लिए उनके पिता ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। यह भूख हड़ताल 26 दिनों तक चली। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे मुलाकात की और आश्वासन दिया कि लद्दाख को ST का दर्जा दिया जाएगा। इसके बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
बाद में 1989 में भारत सरकार ने लद्दाख को ST का दर्जा दिया। अनुसूचित जनजातियों का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में किया गया है।
सोनम वांगचुक के जीवन और उनके शिक्षा सुधार के कार्यों से प्रेरित होकर बॉलीवुड फिल्म 3 Idiots के प्रसिद्ध किरदार “फुंसुख वांगड़ू” की कल्पना की गई थी।
- उत्तराखंड के युवाओं का भविष्य खतरे में? आखिर कब मिलेगा युवाओं को रोजगार?
- भारत में चावल उत्पादन में 6.5% गिरावट का अनुमान | Rice Production in India 2026-27
- निजी विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता को लेकर UGC में शिकायत, मामले पर राज्य सरकार से संपर्क की सलाह
- भारत की कृषि यात्रा में IFFCO की भूमिका: सहकारिता से आत्मनिर्भरता तक
- MSP क्या है और कितने किसानों को इसका लाभ मिलता है?
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा बताई गई जानकारी आपको समझ में आ गई होगी। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।





