• July 17, 2026 9:45 pm

    नमस्कार साथियों,अक्सर कृषि क्षेत्र में हमें विभिन्न प्रकार के उर्वरकों (Fertilizers) और खरपतवार नाशकों (Herbicides) के बारे में जानकारी देखने को मिलती है। इन्हीं में से एक प्रमुख खरपतवार नाशक ग्लाइफोसेट (Glyphosate) है। आज हम आपको इसके इतिहास, उपयोग, कार्य करने के तरीके और इससे जुड़े विवादों के बारे में सरल भाषा में पूरी जानकारी देंगे। इसलिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

    ग्लाइफोसेट (Glyphosate) क्या है?

    ग्लाइफोसेट एक गैर-चयनात्मक (Non-selective) खरपतवार नाशक है, जिसका उपयोग खेतों में उगने वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।यदि इसके इतिहास की बात करें, तो 1950 के दशक में इस रसायन का संश्लेषण सबसे पहले किया गया था। उस समय इसे औषधीय उपयोग के उद्देश्य से देखा गया था, लेकिन इसमें अपेक्षित औषधीय गुण नहीं मिले।

    इसके बाद 1970 के दशक में इस पर दोबारा शोध किया गया और यह पाया गया कि यह खरपतवारों को नष्ट करने में प्रभावी है। इसके बाद 1974 में इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उतारा गया, जिसके बाद इसका उपयोग तेजी से बढ़ने लगा।यह कैसे काम करता है?ग्लाइफोसेट पौधों के अंदर जाकर उनके विकास के लिए आवश्यक एक विशेष एंजाइम (EPSPS) को रोक देता है।

    इसके कारण खरपतवार धीरे-धीरे सूख जाते हैं और अंत में नष्ट हो जाते हैं।क्या इसके नुकसान भी हैं?ग्लाइफोसेट के अत्यधिक और गलत उपयोग को लेकर कई वर्षों से बहस चल रही है। कुछ शोधों में इसके लंबे समय तक संपर्क को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बताया गया है। हालांकि, विभिन्न देशों की नियामक एजेंसियों की राय अलग-अलग है और इस विषय पर अभी भी वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।इसी कारण इसके उपयोग को लेकर समय-समय पर नियम बनाए गए हैं।

    भारत में क्या नियम हैं?

    वर्ष 2022 में भारत सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि ग्लाइफोसेट का उपयोग केवल प्रमाणित पेस्ट कंट्रोल ऑपरेटर (Pest Control Operators) की निगरानी या उनके द्वारा किया जाएगा। इस निर्णय के खिलाफ कई कंपनियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। यह मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक इससे जुड़े नियम न्यायालय के आदेशों के अनुसार लागू होते हैं।

    निष्कर्ष

    ग्लाइफोसेट एक प्रभावी खरपतवार नाशक है,

    लेकिन इसका उपयोग हमेशा वैज्ञानिक सलाह, निर्धारित मात्रा और सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए ही करना चाहिए। किसी भी कृषि रसायन का गलत या अत्यधिक उपयोग किसान, पर्यावरण और स्वास्थ्य तीनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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