अक्सर आपने सुना होगा कि भारत में क्षेत्रीय पार्टी और राष्ट्रीय पार्टी के बारे में खूब चर्चा होती है। नाम से हमें यह पता चलता है कि क्षेत्रीय पार्टी किसी एक क्षेत्र (राज्य) से संबंध रखती है, इसलिए उसे क्षेत्रीय पार्टी कहा जाता है। वहीं राष्ट्रीय पार्टी वह होती है जिसे पूरे देश में मान्यता प्राप्त होती है।
लेकिन यह दर्जा कैसे मिलता है, यह जानना भी जरूरी है।
भारत में राजनीतिक दलों को मान्यता देने का काम Election Commission of India करता है। इसके बारे में संविधान के Article 324 of the Constitution of India में बताया गया है।

राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी में अंतर क्या है
क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा तब मिलता है जब कोई पार्टी किसी राज्य में अच्छा प्रदर्शन करती है। इसके लिए उसे विधानसभा चुनाव में कम से कम 6% वोट और कम से कम 2 सीटें जीतनी होती हैं।
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए कुछ शर्तें होती हैं:
या तो पार्टी को लोकसभा चुनाव में कम से कम 6% वोट और 4 सीटें जीतनी होती हैं,
या फिर उसे कम से कम 4 राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त होना चाहिए।
लोकसभा में 6% वोट हासिल करना आसान नहीं होता, क्योंकि बड़ी पार्टियों जैसे बीजेपी के पास काफी ज्यादा वोट प्रतिशत होता है, इसलिए छोटी पार्टियों को इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है
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निष्कर्ष
उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको समझ में आ गई होगी। अगर कुछ समझ न आया हो तो कमेंट करके जरूर बताएं।
अतिरिक्त जानकारी (दल-बदल कानून)
आपको एक छोटी सी जानकारी यह भी बता दें कि दल-बदल कानून 52nd Constitutional Amendment Act 1985 के तहत 1985 में लागू किया गया था।
इसका मतलब था कि यदि कोई सदस्य दूसरी पार्टी ज्वाइन करता है तो उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है। पहले यदि 1/3 सदस्य दूसरी पार्टी में जाते थे तो उनकी सदस्यता खत्म नहीं होती थी, लेकिन बाद में 91st Constitutional Amendment Act 2003 के जरिए इसे बदलकर 2/3 कर दिया गया।
अब यदि 2/3 सदस्य किसी दूसरी पार्टी में जाते हैं तो उसे विलय (merger) माना जाता है और उनकी सदस्यता बनी रहती है।

