नमस्कार!
कल आपने अपने न्यूज़पेपर में देखा होगा कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की ग्रोथ 7.8% रही। यह बहुत अच्छा नंबर है, लेकिन एग्रीकल्चर की विकास दर मात्र 3.6% ही रही। इससे पता चलता है कि अगर कृषि की ग्रोथ कम रहती है तो इसका असर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
रियल GDP विकास दर – 7.8%
रियल GDP विकास दर (Real GDP Growth Rate – 7.8%) का मतलब है कि महंगाई (Inflation) के असर को हटाकर देश का वास्तविक उत्पादन और अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी है। यह देश की वास्तविक आर्थिक प्रगति को दर्शाता है।

नॉमिनल GDP विकास दर – 10.3%
नॉमिनल GDP विकास दर (Nominal GDP Growth Rate – 10.3%) में वर्तमान बाजार कीमतों के हिसाब से गणना की जाती है। यानी इसमें महंगाई का असर भी शामिल होता है। इसका मतलब है कि बिना महंगाई के प्रभाव को हटाए देश की अर्थव्यवस्था में 10.3% का उछाल आया है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 9.2% की बढ़त
देश के भीतर कारखानों और उद्योगों में सामान बनाने, जैसे गाड़ियां, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां आदि के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 9.2% की बढ़त दर्ज की गई है।
सर्विस सेक्टर में 10% की बढ़त
सेवा क्षेत्र, जैसे IT, बैंकिंग, पर्यटन, टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट और हेल्थकेयर आदि के कारोबार और योगदान में 10% की वृद्धि दर्ज की गई है।
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GDP और GVA में क्या अंतर है?
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। आज हम यह समझेंगे कि कृषि का देश की अर्थव्यवस्था में कितना योगदान है और इसका किसानों की आय पर क्या प्रभाव पड़ता है।
किसी भी क्षेत्र का योगदान मुख्य रूप से GDP और GVA के माध्यम से मापा जाता है।

GVA (Gross Value Added) का अर्थ है किसी क्षेत्र द्वारा उत्पादन करने के बाद लागत घटाकर जो वास्तविक मूल्य जोड़ा जाता है।
अर्थात कुल उत्पादन में से बीज, खाद, डीजल, बिजली, मजदूरी जैसी लागत घटाने के बाद जो राशि बचती है, वही GVA कहलाती है।
पहले सभी क्षेत्रों का GVA निकाला जाता है और फिर इन्हें जोड़कर देश की अर्थव्यवस्था का GDP निकाला जाता है।
कृषि क्षेत्र में केवल फसल उत्पादन ही नहीं आता, बल्कि इसमें पशुपालन, मत्स्य पालन और बागवानी भी शामिल होती है।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा बताई गई जानकारी आपको समझ में आ गई होगी। अगर आपका कोई सवाल है तो कमेंट करके जरूर बताएं।

