नमस्कार,हमने आपको पहले बताया था कि अमेरिका ने भारत और कुछ अन्य देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ लगाया है। शुरुआत में कुछ मामलों में यह टैरिफ लगभग 15% तक था। अमेरिका में टैरिफ लगाने के लिए अलग-अलग कानून हैं।
International Emergency Economic Powers Act (IEEPA), 1977 के अनुसार राष्ट्रपति देश में आपातकाल जैसी स्थिति होने पर आर्थिक फैसले ले सकते हैं। लेकिन हर टैरिफ इसी कानून के तहत नहीं लगाया जाता, कई बार एंटी-डंपिंग या दूसरी व्यापार नीतियों के तहत भी शुल्क लगाया जाता है।

हाल ही में खबर आई कि भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ सोलर पैनल और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों पर लगभग 126% तक टैरिफ लगाया गया है। कुछ अन्य देशों पर भी अलग-अलग दर से शुल्क लगाया गया है। इसका मकसद यह है कि अमेरिका में बने सोलर पैनल और बाहर से आने वाले सोलर पैनल की कीमत में ज्यादा फर्क न रहे, ताकि अमेरिकी कंपनियों को नुकसान न हो।
जैसे भारत भी अपने देश में आने वाले विदेशी सामान पर टैक्स लगाता है, वैसे ही अमेरिका ने भी अपने उद्योगों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है।
अगर पहले किसी सामान पर कम टैरिफ था और अब ज्यादा लगा दिया गया है, तो वह सामान महंगा हो जाएगा।
उदाहरण के लिए, भारत से अमेरिका जाने वाले सोलर पैनल अब वहां ज्यादा कीमत पर बिक सकते हैं।
इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। अगर कंपनियों का निर्यात कम होगा या मुनाफा घटेगा, तो सोलर एनर्जी कंपनियों के शेयर नीचे जा सकते हैं। हालांकि शेयर बाजार कई कारणों से ऊपर-नीचे होता है, सिर्फ टैरिफ ही वजह नहीं होता।
निष्कर्ष:
टैरिफ का उद्देश्य अपने देश के उद्योगों की रक्षा करना होता है, लेकिन इससे कीमतें बढ़ सकती हैं और व्यापार व शेयर बाजार पर असर पड़ सकता है। उम्मीद है कि आपको यह जानकारी आसान भाषा में समझ में आ गई होगी।
अगर आपका कोई सवाल है तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं।
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