• October 30, 2026 6:19 am

    निजी विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता को लेकर UGC में शिकायत, मामले पर राज्य सरकार से संपर्क की सलाह

    उत्तराखंड में संचालित निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, प्लेसमेंट के दावों, फीस के विवरण और विद्यार्थियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क में पारदर्शिता को लेकर UGC e-Samadhaan पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई।


    शिकायत में विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए किए जाने वाले प्लेसमेंट संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि विज्ञापनों और विश्वविद्यालय समाचारों में प्लेसमेंट का उल्लेख किया जाता है, लेकिन वास्तविक रूप से कितने विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
    शिकायतकर्ता ने मांग की कि विश्वविद्यालयों द्वारा किए जाने वाले प्लेसमेंट दावों में कुल विद्यार्थियों की संख्या, प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या तथा प्लेसमेंट का सत्यापन स्पष्ट रूप से किया जाए। केवल सफल विद्यार्थियों की तस्वीरें प्रदर्शित करना पर्याप्त नहीं होना चाहिए।

    इसके अलावा शिकायत में मदवार (Item-wise) फीस विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की गई। इसमें ट्यूशन फीस, लैब, लाइब्रेरी तथा अन्य शुल्कों का स्पष्ट विवरण प्रवेश के समय उपलब्ध कराने की बात कही गई


    शिकायत में विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित अतिरिक्त सांस्कृतिक, शैक्षणिक और तकनीकी कार्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क पर भी स्पष्ट नीति और सीमा निर्धारित करने का अनुरोध किया गया


    UGC ने दिया यह जवाब


    UGC e-Samadhaan पोर्टल पर उपलब्ध शिकायत की स्थिति के अनुसार मामले को Closed कर दिया गया। UGC की ओर से जवाब में कहा गया कि:

    अर्थात राज्य निजी विश्वविद्यालय संबंधित राज्य सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियम, नियम, विनियम और अन्य प्रावधानों के अनुसार संचालित होते हैं। इसलिए इस मामले में संबंधित राज्य सरकार से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

    विद्यार्थियों और अभिभावकों के हित में विश्वविद्यालयों द्वारा फीस और प्लेसमेंट से संबंधित आंकड़ों को स्पष्ट एवं सत्यापित रूप में सार्वजनिक करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


    नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध UGC e-Samadhaan शिकायत और उसमें दर्ज आधिकारिक जवाब पर आधारित है। किसी विशेष विश्वविद्यालय पर आरोप सिद्ध होने का दावा नहीं किया जा रहा है।

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