नमस्कार साथियों!
जब हम उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की बात करते हैं या राज्य के युवाओं को रोजगार देने की बात करते हैं, तो क्या आपको लगता है कि आज उत्तराखंड के युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिल रहा है? क्या उत्तराखंड का युवा पढ़-लिखकर अपने ही राज्य में नौकरी कर पा रहा है?

अगर उत्तराखंड में युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिलता, तो शायद उन्हें नौकरी की तलाश में अपना घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ता। लेकिन आज उत्तराखंड के कई गांवों से लगातार पलायन हो रहा है। लोगों ने अपने घर छोड़ दिए हैं। खेत खाली पड़े हैं। न सब्जियों की खेती हो रही है और न ही फल-फूल उगाने पर पहले जैसा ध्यान दिया जा रहा है।
कई गांवों में आज भी सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर उत्तराखंड का युवा अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर क्यों नहीं तलाश पा रहा है? क्यों उसे अपना भविष्य बनाने के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों की ओर जाना पड़ रहा है?

क्या उत्तराखंड राज्य का निर्माण इसी उद्देश्य से किया गया था?
जब उत्तराखंड राज्य बनाने की मांग उठी थी, तब लोगों ने एक ऐसे राज्य की कल्पना की थी, जहां युवाओं को रोजगार मिले, गांवों का विकास हो, किसानों को सुविधाएं मिलें और लोगों को अपने घर छोड़कर पलायन करने के लिए मजबूर न होना पड़े।
लेकिन आज हमें यह सोचने की जरूरत है कि क्या उत्तराखंड उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसकी कल्पना राज्य निर्माण के समय की गई थी?
उत्तराखंड पोस्ट ऑफिस भर्ती की मेरिट लिस्ट पर सवाल
साथियों, कुछ समय पहले आपने देखा होगा कि उत्तराखंड में पोस्ट ऑफिस की भर्तियों को लेकर युवाओं के बीच चर्चा हो रही थी। इन भर्तियों के लिए उत्तराखंड के युवाओं के साथ-साथ दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया।
लेकिन जब मेरिट लिस्ट में 100%, 99% और 98% जैसे अंक दिखाई देते हैं, तो कई युवाओं के मन में सवाल उठते हैं।
आखिर इतनी अधिक मेरिट कैसे बन रही है? क्या इन अंकों और अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है?
क्या भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है?
यहां मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि केवल अधिक अंक होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को गलत नहीं ठहराया जा सकता। अलग-अलग बोर्डों की मूल्यांकन प्रक्रिया और अंकों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है।
लेकिन अगर भर्ती प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता हुई है या किसी अभ्यर्थी के दस्तावेजों में गड़बड़ी है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उत्तराखंड के युवाओं के मन में उठ रहे इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को पारदर्शिता के साथ देना चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो और योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष अवसर मिले।
उत्तराखंड के युवाओं को आखिर न्याय कब मिलेगा?
साथियों, उत्तराखंड का युवा भी मेहनत करता है, पढ़ाई करता है और अपने भविष्य के लिए दिन-रात तैयारी करता है। ऐसे में उसकी उम्मीद होती है कि उसे अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर मिलें और भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष हो।
सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाएं, गांवों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करें और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करें।
क्योंकि अगर गांव खाली होते रहेंगे, युवा पलायन करते रहेंगे और रोजगार के अवसर सीमित रहेंगे, तो उत्तराखंड के विकास का सपना कैसे पूरा होगा?
अंत में मेरा आप सभी से एक सवाल है: क्या उत्तराखंड के युवाओं को उनके अपने राज्य में पर्याप्त रोजगार मिल रहा है? और क्या पोस्ट ऑफिस भर्ती की मेरिट लिस्ट को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। इस मुद्दे पर आपकी क्या सोच है, हमें अवश्य बताएं।
धन्यवाद!

