नमस्कार,अक्सर हम भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापारिक समझौतों पर चर्चा करते हैं। इन समझौतों का भारत में कई बार विरोध भी किया जाता है, क्योंकि अमेरिका में GM (Genetically Modified) फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं और उनका निर्यात भी किया जाता है। ऐसी आशंका रहती है कि यदि इन फसलों का आयात भारत में बढ़े, तो उनका प्रभाव भारतीय कृषि और बाजार पर पड़ सकता है।

भारत में वर्तमान समय में बीटी कपास (Bt Cotton) ही एक ऐसी जीएम फसल है जिसकी खेती को अनुमति दी गई है। इसके अलावा किसी अन्य जीएम फसल की खेती भारत में अभी भी अधिकतर मामलों में प्रतिबंधित या नियंत्रित मानी जाती है।
अब सवाल उठता है कि GM फसलें क्या होती हैं?
जीएम फसलें वे होती हैं जिनमें वैज्ञानिक किसी दूसरे जीव या जीवाणु के जीन (Gene) को उस फसल के डीएनए में जोड़ देते हैं या उसमें बदलाव कर देते हैं।
इस प्रक्रिया को जीन संशोधन (Genetic Modification) कहा जाता है। इसका उद्देश्य फसल को कीट-प्रतिरोधी, अधिक उत्पादन देने वाली या कठिन परिस्थितियों में टिकाऊ बनाना होता है।
हालांकि कुछ वैज्ञानिक और विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि यदि ऐसी फसलें हमारी खाद्य श्रृंखला (Food Chain) में शामिल होती हैं, तो उनके दीर्घकालिक प्रभावों को समझने में कई दशक लग सकते हैं। इसलिए इस विषय पर अभी भी शोध और बहस जारी है।
आजकल CRISPR-Cas9 नामक तकनीक की भी चर्चा हो रही है। यह पारंपरिक जीएम तकनीक से थोड़ी अलग है। इसमें किसी बाहरी जीव का जीन जोड़ने के बजाय वैज्ञानिक डीएनए के भीतर मौजूद जीन को ही संपादित (Gene Editing) करते हैं। इसलिए इसे अधिक सटीक और आधुनिक तकनीक माना जाता है।
निष्कर्ष:
जीएम फसलें और जीन एडिटिंग आधुनिक कृषि विज्ञान की महत्वपूर्ण तकनीकें हैं। इनसे कृषि उत्पादन बढ़ाने और नई चुनौतियों से निपटने की संभावनाएँ हैं, लेकिन इनके प्रभावों को समझने के लिए सावधानी और वैज्ञानिक अध्ययन भी उतने ही आवश्यक हैं।
CRISPR-Cas9 क्या है? सरल भाषा में पूरी जानकारी
भारत में भारत में बेरोजगारी दर क्या है?(what is the unemployment rate in india)

