
खेत के पास किसानों की बदलती तस्वीर
जब खेत के पास ज्यादातर किसान खड़े हो जाएं, तो समझ जाइए कि या तो खेती अच्छी हुई है, कोई नई मशीन आई है या फिर किसी ने मिट्टी की जांच की है। कोई नमो ड्रोन दीदी योजना की बात करता है, तो कोई कहता है कि खेती बदल रही है भाई।
कृषि बजट में बड़ा बदलाव
एक समय वह भी था, जब किसानों की बातें नई तकनीक से कम और मौसम तथा नुकसान से ज्यादा शुरू होती थीं। साल 2013-14 में कृषि बजट 27,663 करोड़ रुपये मात्र था और वर्तमान में यह बढ़कर 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। जहां पहले किसानों को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिलती थी, वहीं अब कृषि बजट में लगातार बढ़ोतरी हुई है और सरकार किसानों के साथ खड़ी दिखाई देती है।
खाद पर सब्सिडी से किसानों को राहत
युद्ध की वजह से दुनिया में खाद के दाम बढ़े, फिर भी सरकार ने 2.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी सब्सिडी देकर इसका बोझ किसानों पर नहीं आने दिया।
पीएम किसान सम्मान निधि से किसानों को आर्थिक मदद
पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि किसानों के खातों में डाली गई है। करीब 8 करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं।
फसल बीमा बना किसानों का सुरक्षा कवच
पीएम फसल बीमा योजना के तहत हर साल किसानों को सुरक्षा कवच मिल रहा है और करोड़ों किसानों ने इसका लाभ लेने के लिए आवेदन किया है।
मोबाइल से मंडी तक पहुंच
अब किसान सिर्फ मौसम की जानकारी ही नहीं देखता, बल्कि मोबाइल पर बाजार की जानकारी भी प्राप्त कर सकता है। ई-नाम डिजिटल मंडी से करीब 2 करोड़ किसान देशभर की मंडियों से जुड़े हैं।
मिट्टी की जांच पर भी जोर
करीब 26 करोड़ सॉइल हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिससे किसानों को अपनी मिट्टी की सेहत समझने और उसके अनुसार खेती करने में मदद मिलती है।
खेती के साथ बढ़ रही ब्लू इकोनॉमी
सिर्फ खेती ही नहीं, बल्कि ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया जा रहा है। मछली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हुई है और भारत आज दुनिया के प्रमुख मछली उत्पादक देशों में शामिल है।
भारत दुनिया को खिला रहा है
आज भारत दुनिया को खिला रहा है। दूध, दही, मसाले और कई कृषि उत्पादों के उत्पादन में भारत दुनिया में अग्रणी है। खेतों से निकलने वाला कृषि उत्पाद आज भारत के निर्यात को भी मजबूती दे रहा है।
नई तकनीक से बदल रही खेती
खेती अब सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रही है। नई तकनीक, ड्रोन, डिजिटल मंडी, मिट्टी की जांच, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं ने किसानों के काम करने के तरीके को बदलना शुरू कर दिया है।
हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको समझ में आ गई होगी।


