नमस्ते दोस्तों, ‘My Smart Tips’ में आपका स्वागत है।
आज मैं बहुत गुस्से में हूँ। गुस्सा उन न्यूज़ चैनलों पर जो हमें ‘इंसान’ नहीं, सिर्फ एक ‘क्लिक’ समझते हैं। आज का यह लेख उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो न्यूज़ के नाम पर कूड़ा परोस रहे हैं। यह लेख पहाड़ की भोली जनता, देश के कोने-कोने के नौजवानों और विदेशों में बैठे भारतीयों की उस पीड़ा की आवाज़ है, जिसे ये न्यूज़ वाले अनसुना कर देते हैं।
1. हेडलाइन का ‘जहर’ और हमारी अम्मा का भरोसा

जब हमारे पहाड़ की बुजुर्ग अम्मा धूप में बैठकर अपना मोबाइल खोलती हैं, तो न्यूज़ चैनल वाले उनकी आंखों में धूल झोंकने के लिए तैयार बैठे होते हैं। बाहर फोटो लगाएंगे किसी की मौत की या किसी बड़े हादसे की, और ऊपर चिल्लाते हुए शब्दों में लिखेंगे— “अभी-अभी हो गया महा-विनाश, देखिए लाइव वीडियो!” बेचारी अम्मा घबराकर क्लिक करती हैं, लेकिन अंदर क्या निकलता है? अंदर निकलता है वही सड़ा-गला पुराना वीडियो। न्यूज़ वालों, शर्म करो!
तुम्हारी उस एक झूठी हेडलाइन से किसी बुजुर्ग का दिल बैठ सकता है। क्या चंद रुपयों के लिए किसी की भावनाओं के साथ खेलना ही तुम्हारी पत्रकारिता है?
2. व्यूज की ‘हवस’ में अंधे न्यूज़ चैनल
इन न्यूज़ चैनलों को अब खबरों से मतलब नहीं रहा, इन्हें सिर्फ ‘व्यूज’ की हवस है। इनके लिए खबर खबर नहीं, बल्कि एक ‘मछली पकड़ने का कांटा’ है। ये हेडलाइन में ऐसा झूठ लिखते हैं जनता भी सोच में पड़ जाए। “राजस्थान में गिरे एलियन”, “उत्तराखंड में फटने वाला है पहाड़”— ऐसी बकवास खबरें बनाकर ये लोग जनता को मानसिक रूप से बीमार कर रहे हैं। ये पत्रकार नहीं, ये डिजिटल लुटेरे हैं जो हमारा समय और भरोसा लूट रहे हैं।
3. देश-विदेश की जनता अब बेवकूफ नहीं है!
चाहे हमारा भाई अमेरिका-कनाडा में बैठा हो या गांव की पगडंडी पर, आज हर किसी के हाथ में इंटरनेट है। न्यूज़ वालों को लगता है कि जनता ‘गंवार’ है और कुछ भी दिखा दोगे तो चल जाएगा। लेकिन याद रखो, जिस जनता ने तुम्हें फर्श से अर्श पर बिठाया है, वही जनता तुम्हें मिट्टी में मिलाना भी जानती है। तुम्हारी ‘क्लिकबेट’ की दुकान अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी क्योंकि अब लोग जागरूक हो चुके हैं।
4. पत्रकारिता का ‘जनाज़ा’ निकाल दिया इन लोगों ने
कभी पत्रकारिता का मतलब होता था— सच को निडरता से बोलना। लेकिन आज के इन ‘यूट्यूबिया’ न्यूज़ चैनलों ने पत्रकारिता का जनाज़ा निकाल दिया है। इन्होंने न्यूज़ को ‘सर्कस’ बना दिया है। थंबनेल (फोटो) पर ऐसी गंदी और भ्रामक फोटो लगाएंगे कि परिवार के साथ बैठकर मोबाइल देखना मुश्किल हो जाए। ये न्यूज़ चैनल नहीं, बल्कि इंटरनेट का कचरा हैं।
5. न्यूज़ चैनल वालों को आखिरी चेतावनी!
सुन लो न्यूज़ चैनल वालों! अपनी ये ‘मिर्च-मसाले’ वाली झूठी हेडलाइन्स अपनी जेब में रखो। अगर तुम्हारे पास दिखाने को सच नहीं है, तो कैमरा बंद कर दो और जाकर कोई और धंधा कर लो। न्यूज़ के पवित्र नाम को बदनाम मत करो। जनता का भरोसा एक बार टूट गया, तो तुम चाहे सिर के बल खड़े हो जाओ, कोई तुम्हारा वीडियो नहीं देखेगा। अपनी हेडलाइन को ‘क्लिकबेट’ नहीं, ‘जिम्मेदारी’ बनाओ।
6. जनता जनार्दन के लिए संदेश (हमारा हथियार)
मेरे दोस्तों, अब समय आ गया है इन ‘झूठ के सौदागरों’ को सबक सिखाने का:
- थप्पड़ मारो ‘रिपोर्ट’ से: जैसे ही कोई झूठी हेडलाइन दिखे, तुरंत उसे Report करो। यूट्यूब को बताओ कि ये लोग गुमराह कर रहे हैं।
- थूक दो ऐसे चैनलों पर: जो चैनल झूठ बोलता है, उसे तुरंत Unsubscribe करो। उन्हें एक भी व्यू मत दो।
- अम्मा-बाबू को सिखाओ: अपने घर के बड़ों को बताओ कि मोबाइल पर दिखने वाली हर हेडलाइन सच नहीं होती।
निष्कर्ष:
खबर वो है जो सच हो, न कि वो जो सिर्फ देखने में सनसनीखेज हो। हम न्यूज़ देखेंगे, लेकिन धोखा नहीं खाएंगे। इन न्यूज़ चैनलों को अपनी औकात याद दिलाने का वक्त आ गया है।
अगर आपको लगता है कि मैंने आपके दिल की बात कही है, तो इस लेख को इतना शेयर करो कि हर न्यूज़ चैनल के दफ्तर तक यह पहुंच जाए और उनकी रातों की नींद उड़ जाए!
“यह लेख जनहित में जारी किया गया है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या चैनल की छवि खराब करना नहीं, बल्कि दर्शकों को जागरूक करना है।”

