• April 23, 2026 4:22 pm

    उत्तराखंड डाकिया भर्ती में बाहरी राज्यों के छात्र क्यों हुए ज्यादा चयनित? जानिए पूरा कारण

    नमस्कार, जब हम बात करते हैं सरकारी जॉब की, तो आज हर व्यक्ति सरकारी नौकरी की चाह में लगातार तैयारी कर रहा है। हम भी समय-समय पर आपको देश-विदेश में क्या चल रहा है, इन विषयों के ऊपर जानकारी देते रहते हैं। साथ ही कौन-कौन सी वैकेंसी आई है और उनके लिए क्या योग्यता चाहिए, यह भी हम आपको बताते रहते हैं।

    हाल ही में उत्तराखंड में डाकिया (पोस्टमैन) पद के लिए एक सरकारी भर्ती आई थी। इस भर्ती में चयन पूरी तरह से हाई स्कूल के नंबरों के आधार पर किया गया था।

    जब इसकी मेरिट लिस्ट जारी हुई, तो एक चीज देखने को मिली कि हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के छात्रों ने भी इसमें आवेदन किया था और चयन में इन राज्यों के छात्रों की संख्या अधिक रही, जबकि उत्तराखंड के छात्रों का चयन कम हुआ।
    ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड की मार्किंग प्रणाली अलग होती है।

    उत्तराखंड में हाई स्कूल या इंटर में 60%, 70% या 80% अंक आना सामान्य बात है, लेकिन 95% से अधिक अंक लाना काफी कठिन होता है। वहीं, हरियाणा या CBSE जैसे बोर्ड में 95%–99% अंक लाना तुलनात्मक रूप से आसान माना जाता है। इसी कारण मेरिट में अन्य राज्यों के छात्र आगे निकल जाते हैं।

    डाकिया का काम केवल डाक पहुंचाना नहीं होता, बल्कि लोगों से जुड़ना भी होता है। उत्तराखंड में कुमाऊनी और गढ़वाली भाषा का ज्ञान होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे लोगों से बेहतर तरीके से संपर्क किया जा सकता है।

    इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में काम करना भी चुनौतीपूर्ण होता है, जिसमें स्थानीय युवाओं को अधिक अनुभव होता है।

    जब बाहरी राज्य के छात्र चयनित होते हैं, तो उन्हें इन परिस्थितियों में काम करने में कठिनाई हो सकती है। इसलिए यह सोचना जरूरी है कि क्या केवल हाई स्कूल के नंबरों के आधार पर चयन करना सही है, या फिर इसमें अन्य योग्यताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।

    निष्कर्ष:

    उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको समझ में आई होगी। आप अपनी राय कमेंट करके जरूर बताएं।

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