जब हम सुनते हैं कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, तो अच्छा लगता है। गर्व भी होता है। आज भारत नई तकनीक अपना रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में भी देश आगे बढ़ रहा है। चंद्रयान-3 जैसे मिशन इसकी मिसाल हैं।
लेकिन इन सब बातों के बीच एक सवाल बार-बार मन में आता है—हमारा देश सच में किस दिशा में जा रहा है
भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा युवा आबादी है। 18 से 30 साल के करीब 37 करोड़ युवा हमारे देश में हैं। यह बहुत बड़ी ताकत है। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि इन्हीं युवाओं में से बहुत से आज बेरोज़गार हैं।
इसका एक बड़ा कारण यह है कि ज़्यादातर युवा सिर्फ़ सरकारी नौकरी के पीछे भागते हैं। वे नई स्किल सीखने की कोशिश नहीं करते। स्कूलों में बच्चों को सिर्फ़ किताबों का ज्ञान दिया जाता है। काम करने की सीख बहुत कम मिलती है। कई जगह अध्यापक ठीक से नहीं पढ़ाते।
कॉलेजों में फीस तो पूरी ली जाती है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता ठीक नहीं होती। कई कॉलेजों में लैब तक नहीं होती। ऐसे में छात्र डिग्री तो ले लेते हैं, लेकिन काम लायक ज्ञान नहीं मिल पाता।

आज देश में बेरोज़गारी दर करीब 7.2% है। यह बहुत चिंता की बात है। जब इतनी बड़ी युवा आबादी काम के बिना रहे, तो देश आगे कैसे बढ़ेगा
सरकारी नौकरियों के पेपर बार-बार लीक हो जाते हैं। कई बार पैसे देकर सीटें खरीदी जाती हैं। मेहनती छात्रों के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय है। इससे युवाओं का भरोसा सिस्टम से उठता जा रहा है।

आज का युवा सच बोलने से डरता है। वह सोचता है कि बोलने से क्या फ़ायदा होगा। लेकिन जब तक सच सामने नहीं आएगा, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।
स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि युवा ही देश की ताकत हैं। आज हमें फिर से उनके विचारों को समझने की ज़रूरत है।
अगर हमें सच में विकसित भारत बनाना है, तो युवाओं को सही शिक्षा, सही दिशा और सच बोलने का हौसला देना होगा। तभी देश सही रास्ते पर आगे बढ़ पाएगा।
निष्कर्ष
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