नमस्कार, एक वक्त ऐसा भी था जब हर कोई दूरदर्शन देखा करता था। 1959 में जब दूरदर्शन की स्थापना हुई, तब धीरे-धीरे यह देश के हर घर तक पहुंचने लगा। उस समय हर व्यक्ति, हर युवा दूरदर्शन के बारे में जानता था। दूरदर्शन केवल एक चैनल नहीं था, बल्कि लोगों के लिए जानकारी, शिक्षा और समाचार का सबसे बड़ा माध्यम था।

लेकिन आज 2026 का समय है। अगर आप किसी भी घर में जाकर देख लें, तो टीवी पर दूरदर्शन बहुत कम देखने को मिलेगा। शायद केवल 1 से 2 प्रतिशत लोगों के घरों में ही दूरदर्शन चलता हो। आज की युवा पीढ़ी से अगर पूछा जाए कि दूरदर्शन क्या है, तो कई बच्चों को इसका सही मतलब तक पता नहीं होगा। उन्हें यह भी नहीं पता कि दूरदर्शन भारत का एक प्रमुख सरकारी चैनल रहा है।
दूरदर्शन केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि यह सिखाता था कि समाचार कैसे दिखाए जाते हैं और किस प्रकार शांतिपूर्ण एवं मर्यादित तरीके से लोगों तक जानकारी पहुंचाई जाती है। उस समय खबरों में शोर-शराबा नहीं होता था। समाचार सीधे, सरल और समझने योग्य होते थे।
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लेकिन आज की मीडिया को देखिए। कई चैनलों की हेडलाइन देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं। “हो गया विनाश”, “आ गई बड़ी भविष्यवाणी”, “देश में मच गया हड़कंप” जैसी बातें दिखाकर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की जाती है। फिर दो-तीन लोगों को बहस के लिए बुलाया जाता है और मुद्दे पर चर्चा कम, लड़ाई ज्यादा देखने को मिलती है। इसे सही मायनों में समाचार नहीं कहा जा सकता।
1967 में दूरदर्शन पर “कृषि दर्शन” नाम का कार्यक्रम शुरू हुआ था। इस कार्यक्रम में किसानों को नई तकनीकों, खेती के आधुनिक तरीकों और उत्पादन बढ़ाने के उपायों के बारे में बताया जाता था। साथ ही सरकार की नई योजनाओं की जानकारी भी दी जाती थी।
बाद में 2015 में “डीडी किसान” चैनल शुरू किया गया, जिसमें कृषि से जुड़ी योजनाएं और किसानों के लिए उपयोगी जानकारी प्रसारित की जाने लगी।
इसी प्रकार एक समय ऐसा था जब बीएसएनएल का नाम हर व्यक्ति जानता था। बीएसएनएल की स्थापना वर्ष 2000 में हुई और उस समय यह लोगों के बीच काफी लोकप्रिय था। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। अब बहुत कम लोग बीएसएनएल का इस्तेमाल करते हैं।
इसका फायदा अन्य निजी कंपनियों को मिला और उन्होंने रिचार्ज के दाम लगातार बढ़ा दिए।
आज 28 दिन का रिचार्ज ₹300 से ₹400 तक पहुंच चुका है। एक साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन वाले रिचार्ज के कारण लोगों को लगभग 13 बार रिचार्ज करवाना पड़ता है।
यानी आम आदमी पर अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। ₹300 या ₹400 का रिचार्ज करवाना हर परिवार के लिए छोटी बात नहीं, बल्कि एक बड़ा खर्च है।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा बताई गई यह झलक आपको समझ में आई होगी। समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। दूरदर्शन और बीएसएनएल जैसी सेवाएं, जो कभी लोगों की पहली पसंद थीं, आज धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी से दूर होती जा रही हैं।

