• February 23, 2026 1:42 am

    दिवाकर भट्ट : उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्षशील नेता।

    उत्तराखंड : संघर्ष, संस्कृति और पहचान का राज्य
    उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, जिसका निर्माण केवल भौगोलिक आधार पर नहीं, बल्कि लंबे जनसंघर्ष, बलिदान और सांस्कृतिक चेतना के परिणामस्वरूप हुआ है। जब हम उत्तराखंड के इतिहास को पढ़ते हैं, तो हमें अनेक राजवंशों और वीर व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी मिलती है। कत्युरी वंश और चंद्रवंश जैसे राजवंशों ने इस क्षेत्र की राजनीतिक और सांस्कृतिक नींव रखी।

    आधुनिक इतिहास में उत्तराखंड के निर्माण के लिए जिन महापुरुषों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनमें श्री देव सुमन का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। उनका जन्म 1914 में हुआ और 1944 में उन्होंने उत्तराखंड की अस्मिता और जनअधिकारों के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इसी प्रकार वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध आवाज़ उठाकर साहस और स्वाभिमान की मिसाल कायम की।


    उत्तराखंड केवल एक प्रशासनिक राज्य नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर संस्कृति, परंपरा, लोकभाषा और संघर्ष की गहरी चेतना को समेटे हुए है। इस राज्य के निर्माण के लिए अनगिनत लोगों ने जेल यात्राएँ कीं, आंदोलनों में भाग लिया और कई बार अपने जीवन की आहुति भी दी। आज का दिन उन सभी संघर्षों और बलिदानों को स्मरण करने का दिन है।
    इन्हीं संघर्षशील व्यक्तित्वों में एक महत्वपूर्ण नाम दिवाकर भट्ट का भी है, जिन्हें उत्तराखंड क्रांति आंदोलन के महानायकों में गिना जाता है। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को एक नई दिशा और पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


    दिवाकर भट्ट जी कौन थे


    दिवाकर भट्ट वह व्यक्तित्व थे जिन्होंने उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने घर-घर जाकर लोगों को उत्तराखंड राज्य की आवश्यकता और पहाड़ की समस्याओं के प्रति जागरूक किया। वे जनता को संगठित करने वाले, वैचारिक रूप से मजबूत और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेता थे।


    दिवाकर भट्ट जी का जन्म 1946 में टिहरी गढ़वाल जनपद में हुआ था। उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल को मजबूत आधार प्रदान किया और इसे उत्तराखंड की आवाज़ बनाने का कार्य किया। उत्तराखंड की बेरोजगारी, पलायन, संसाधनों की लूट और स्थानीय अधिकारों जैसे मुद्दों को उन्होंने प्रमुखता से उठाया।

    25 नवंबर 2025 को उनके निधन के साथ उत्तराखंड आंदोलन के एक युग का अंत हो गया, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और योगदान आज भी उत्तराखंड की चेतना में जीवित हैं।


    आज जब हम उत्तराखंड के इतिहास और वर्तमान पर दृष्टि डालते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि यह राज्य अनेक महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान की देन है। इस वेबसाइट के माध्यम से हमारा उद्देश्य उसी इतिहास, संघर्ष और चेतना को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।


    आपसे अनुरोध है कि उत्तराखंड से जुड़े सभी लेखों को अवश्य पढ़ें और इस विरासत को समझने व सहेजने में अपना योगदान दें।

    निष्कर्ष

    उम्मीद करते हैं हमारे द्वारा बताइए की जनकारी आपको समझ में आ गई यदि कोई सवाल है तो कमेंट करके पूछे

    वीर सावरकर कौन थे

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