नमस्कार, कृषि के क्षेत्र में लगातार नई-नई तकनीकें आ रही हैं। भारत सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए समय-समय पर नई योजनाएं ला रही है। आज के समय में ऑर्गेनिक फार्मिंग, नेचुरल फार्मिंग और जैविक खेती जैसे शब्द हम लगातार सुनते रहते हैं। सरकार भी इस बात पर अधिक जोर दे रही है कि खेतों में रासायनिक उर्वरकों और केमिकल पेस्टिसाइड्स का प्रयोग कम से कम किया जाए और प्राकृतिक तरीकों से खेती को आगे बढ़ाया जाए।

इसी कड़ी में आज हम एक ऐसे बायो कंट्रोल एजेंट के बारे में चर्चा करने वाले हैं जो प्राकृतिक रूप से सैकड़ों प्रकार के कीटों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इस फंगस का नाम है विवेरिया बस्सियाना (Beauveria bassiana)।
यह एक लाभकारी फंगस है जिसका प्रयोग खेती में कीट नियंत्रण के लिए किया जाता है। माना जाता है कि यह लगभग 700 से अधिक प्रकार के हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने में प्रभावी हो सकता है।
विवेरिया बस्सियाना क्या है?
दोस्तों, जैसा कि आप लोग जानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन बहुत तेजी से देखने को मिल रहा है। असंतुलित वर्षा, बढ़ता तापमान, अधिक नमी और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं का सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मानव गतिविधियां मानी जाती हैं। खेती में भी हम लोग अत्यधिक पानी, रासायनिक उर्वरकों और केमिकल पेस्टिसाइड्स का बहुत ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं।
इन रसायनों के अत्यधिक उपयोग से केवल हानिकारक कीट ही नहीं मरते, बल्कि खेतों में मौजूद लाभकारी जीव और मित्र कीट भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। परिणामस्वरूप कुछ हानिकारक कीटों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और समय के साथ उनका प्रकोप लगातार बढ़ता चला जाता है। यही कारण है कि आज किसानों को पहले की तुलना में अधिक मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही और खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
जानिए कैसे यह तकनीक कृषि क्षेत्र में नया अध्याय लिख रही है
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ऐसी स्थिति में जैविक और प्राकृतिक विकल्पों की आवश्यकता महसूस होती है। विवेरिया बस्सियाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण जैविक फंगस है। यह मुख्य रूप से कीटों के शरीर पर हमला करता है। जब इस फंगस के स्पोर किसी कीट के शरीर के संपर्क में आते हैं, तो यह उसके शरीर के अंदर प्रवेश कर धीरे-धीरे उसे नष्ट कर देते हैं। कुछ समय बाद कीट मर जाता है और यह फंगस दूसरे कीटों में भी फैल सकता है।
किन फसलों में किया जाता है प्रयोग?
इसका प्रयोग सब्जियों, दलहनी फसलों, तिलहनी फसलों, कपास, गन्ना तथा कई बागवानी फसलों में किया जाता है। विशेष रूप से सफेद मक्खी, माहू, थ्रिप्स, दीमक, इल्ली और कई चूसक एवं काटने वाले कीटों के नियंत्रण में इसे प्रभावी माना जाता है।
खेत में कैसे करें उपयोग?
विवेरिया बस्सियाना का प्रयोग ड्रिप इरिगेशन, मिट्टी उपचार या पत्तियों पर स्प्रे करके किया जा सकता है। जब इसे पत्तियों के ऊपर और नीचे की सतह पर छिड़का जाता है, तो कीट इसके संपर्क में आते हैं। कई बार कीट जब पत्तियों को खाते हैं या उन पर बैठते हैं, तब यह फंगस उनके शरीर में पहुंचकर उन्हें संक्रमित कर देता है।
प्रयोग करते समय जरूरी सावधानियां
हालांकि इसका प्रयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी होती हैं। इसे तेज धूप में स्प्रे नहीं करना चाहिए। शाम के समय या हल्की नमी वाले वातावरण में इसका प्रयोग अधिक प्रभावी माना जाता है। साथ ही केमिकल फंगीसाइड्स के साथ तुरंत इसका प्रयोग करने से इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है। इसलिए जैविक उत्पादों के उपयोग में सही समय और सही तरीका बहुत महत्वपूर्ण होता है।
निष्कर्ष
आज के समय में प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि की दिशा में ऐसे जैविक उत्पाद किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनते जा रहे हैं। यदि किसान सही जानकारी और सही तकनीक के साथ इनका उपयोग करें, तो खेती की लागत कम करने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

