नमस्कार,आजकल हम देख रहे हैं कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और भारतीय रुपया कमजोर होता जा रहा है। अगर आज की बात करें, तो 1 डॉलर खरीदने के लिए लगभग 94 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि डॉलर की कीमत बढ़ गई है और रुपया कमजोर हो गया है।अब सवाल आता है कि ऐसा क्यों हो रहा है?

डॉलर मजबूत क्यों हो रहा है?
डॉलर की मांग ज्यादा होना
दुनिया में ज्यादातर व्यापार (Import-Export) डॉलर में होता है। भारत को भी तेल, मशीनें और कई चीजें बाहर से खरीदनी पड़ती हैं, जिसके लिए डॉलर चाहिए।
जब डॉलर की मांग बढ़ती है, तो उसकी कीमत भी बढ़ जाती है।
डॉलर की कमी होना
अगर भारतीय बाजार में डॉलर कम पहुंच रहा है (जैसे विदेशी निवेश कम आ रहा हो), तो डॉलर की कमी हो जाती है।जब चीज कम हो और मांग ज्यादा हो — तो कीमत बढ़ती है।
विदेशी निवेश का कम होना
जब विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे रुपये बेचकर डॉलर खरीदते हैं।
इससे डॉलर की मांग और बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है।
अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्था
जब अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, तो लोग वहां निवेश करना पसंद करते हैं।इससे डॉलर की मांग और बढ़ जाती है।
चीन अपनी करेंसी को कमजोर क्यों रखता है?
- चीन ज्यादा से ज्यादा सामान Export करता है।
- वह अपनी करेंसी (युआन) को डॉलर से थोड़ा कमजोर रखता है ताकि:
- उसका सामान दूसरे देशों में सस्ता लगे
- Export बढ़े देश को ज्यादा फायदा हो
भारत पर इसका क्या असर पड़ता है?
- भारत को विदेश से चीजें खरीदने के लिए ज्यादा रुपये देने पड़ते हैं
- कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा डॉलर चाहिए होता है
- पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
- महंगाई बढ़ सकती है
निष्कर्ष
डॉलर मजबूत इसलिए हो रहा है क्योंकि उसकी मांग ज्यादा है और सप्लाई कम है, जबकि रुपया कमजोर इसलिए हो रहा है क्योंकि भारत में डॉलर कम आ रहा है और खर्च ज्यादा हो रहा है।
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