• March 17, 2026 5:14 am

    ईरान और इज़राइल की कहानी – क्यों होता है झगड़ा

    बहुत समय पहले की बात है। आज से लगभग 100 साल पहले मध्य-पूर्व नाम के इलाके में एक बड़ा साम्राज्य था जिसे ओटोमन साम्राज्य कहा जाता था। इस साम्राज्य के अंदर फिलिस्तीन नाम की जगह भी आती थी। जब प्रथम विश्व युद्ध (1914–1918) हुआ तो इस युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य टूट गया। इसके बाद फिलिस्तीन का इलाका ब्रिटेन के नियंत्रण में आ गया।


    उसी समय यूरोप में रहने वाले यहूदी लोग अपने लिए एक सुरक्षित देश चाहते थे, क्योंकि कई जगह उनके साथ भेदभाव और अत्याचार हो रहे थे। 1917 में ब्रिटेन ने एक घोषणा की जिसे बालफोर घोषणा कहा जाता है। इसमें कहा गया कि फिलिस्तीन में यहूदियों के लिए एक राष्ट्रीय घर बनाया जा सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे बहुत से यहूदी लोग फिलिस्तीन में आकर बसने लगे। लेकिन वहाँ पहले से अरब लोग रहते थे। उन्हें डर लगने लगा कि बाहर से आने वाले लोग उनकी जमीन और उनका अधिकार छीन सकते हैं। इसलिए दोनों के बीच झगड़े शुरू होने लगे।


    कुछ साल बाद दुनिया में द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) हुआ। इस युद्ध के दौरान यूरोप में यहूदियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ। लाखों यहूदियों को मार दिया गया। इस घटना को होलोकॉस्ट कहा जाता है। इसके बाद दुनिया के कई देशों को लगा कि यहूदियों को अपना अलग देश मिलना चाहिए जहाँ वे सुरक्षित रह सकें।


    इसलिए 1947 में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने फैसला किया कि फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बाँट दिया जाए।
    एक हिस्सा यहूदियों के लिए


    दूसरा हिस्सा अरब लोगों के लिए लेकिन अरब देशों को यह फैसला मंजूर नहीं था। इसके बावजूद 1948 में यहूदियों ने अपना नया देश बना लिया जिसका नाम इज़राइल रखा गया। जैसे ही इज़राइल बना, आसपास के कई अरब देशों ने उस पर हमला कर दिया और युद्ध शुरू हो गया। इसे अरब-इज़राइल युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध के बाद भी इज़राइल एक देश के रूप में बना रहा।


    इसके बाद कई सालों तक इज़राइल और अरब देशों के बीच तनाव बना रहा। फिर 1979 में ईरान नाम के देश में एक बड़ी क्रांति हुई। इस क्रांति के बाद ईरान की नई सरकार ने कहा कि वह इज़राइल को अपना दुश्मन मानती है। इसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह खत्म हो गए।


    ईरान ने उन लोगों और संगठनों का समर्थन करना शुरू किया जो फिलिस्तीन के पक्ष में और इज़राइल के खिलाफ थे। दूसरी ओर इज़राइल को डर था कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार बना सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इज़राइल के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। इसलिए दोनों देशों के बीच दुश्मनी और बढ़ती गई।
    कई वर्षों तक दोनों देशों के बीच सीधा युद्ध नहीं हुआ, लेकिन वे दूसरे देशों और संगठनों के माध्यम से एक-दूसरे से लड़ते रहे। इसे प्रॉक्सी युद्ध कहा जाता है। कभी-कभी इज़राइल ईरान के ठिकानों पर हमला कर देता है और कभी ईरान या उसके समर्थक समूह इज़राइल पर हमला कर देते हैं।


    आज भी यही कारण है कि ईरान और इज़राइल के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों देश एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते और एक-दूसरे को खतरा मानते हैं। इसलिए समय-समय पर उनके बीच संघर्ष और हमले होते रहते हैं।


    सरल शब्दों में समझें तो:


    जमीन का विवाद


    पुराने युद्ध


    धर्म और राजनीति


    परमाणु हथियार का डर


    इन सभी कारणों की वजह से ईरान और इज़राइल के बीच आज भी तनाव और संघर्ष चल रहा है।

    निष्कर्ष

    उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको समझ में आई होगी। यदि आपके मन में कोई सवाल है तो आप कमेंट करके जरूर बताएं। ऐसी ही नई जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

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