
भारत एक कृषि प्रधान देश है। देश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने कृषि उत्पादन बढ़ाने, किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कृषि को वैज्ञानिक आधार देने के लिए अनेक कानून, योजनाएँ, मिशन और अनुसंधान संस्थान स्थापित किए। इन्हीं प्रयासों के कारण आज भारत कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सका है।

कृषि से संबंधित प्रमुख कानून
कृषि व्यवस्था को नियंत्रित और सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए—
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 – खाद्यान्न, दाल, तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए।
- बीज अधिनियम, 1966 – किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने हेतु।
- उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) – उर्वरकों की गुणवत्ता, मूल्य और वितरण को नियंत्रित करने के लिए।
- APMC अधिनियम – कृषि उपज के विपणन को सुव्यवस्थित करने हेतु।
- खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (FSSAI) – सुरक्षित और मानक खाद्य पदार्थ सुनिश्चित करने के लिए।
- FERA, 1973 एवं FEMA, 1999 – विदेशी मुद्रा प्रबंधन से संबंधित कानून।
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 – गरीब वर्ग को खाद्यान्न सुरक्षा प्रदान करने हेतु।
कृषि विकास से संबंधित प्रमुख योजनाएँ एवं मिशन
भारत में कृषि विकास का आधार विभिन्न क्रांतियाँ और योजनाएँ रही हैं—
- हरित क्रांति – खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि
- श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) – दुग्ध उत्पादन
- नीली क्रांति – मत्स्य पालन
- राष्ट्रीय कृषि मिशन
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (2007)
- ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार)
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
- राष्ट्रीय गोकुल मिशन
इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और जोखिम कम करना है।
बागवानी एवं फाइबर फसल अनुसंधान संस्थान
बागवानी और रेशा फसलों के विकास के लिए विशेष अनुसंधान संस्थान स्थापित किए गए—
- केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान – कपास की उन्नत किस्मों और उत्पादन तकनीक पर अनुसंधान।
- केंद्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान – जूट और अन्य रेशा फसलों के विकास हेतु।
- केंद्रीय समशीतोष्ण बागवानी संस्थान – सेब, नाशपाती जैसी समशीतोष्ण फसलों पर अनुसंधान।
प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR प्रणाली)
भारत में कृषि अनुसंधान का संचालन मुख्य रूप से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत होता है—
फसल एवं मृदा
- केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (CRRI)
- केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान
- भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान
- भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान
- भारतीय गन्ना प्रजनन संस्थान
पशुपालन
- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान
- राष्ट्रीय पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान संस्थान
- केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान
मत्स्य पालन
- केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान
- केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान
- केंद्रीय मीठे पानी की मत्स्य पालन संस्थान
अन्य प्रमुख संस्थान
- राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान अकादमी
- राष्ट्रीय पादप आनुवंशिकी ब्यूरो
- भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान
- भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान
बीज, तकनीक और नवाचार
- हाइब्रिड बीजों का विकास
- बीज प्रमाणीकरण और ट्रेसबिलिटी
- डिजिटल बीज इन्वेंट्री
- कृषि में ड्रोन और आधुनिक मशीनें
- सूचना प्रौद्योगिकी आधारित कृषि
निष्कर्ष
भारत में कृषि विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया रही है, जिसमें कानूनों, योजनाओं, मिशनों और अनुसंधान संस्थानों की अहम भूमिका रही है। इन प्रयासों से न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय, खाद्य सुरक्षा और कृषि की स्थिरता भी मजबूत हुई है। भविष्य में तकनीक और अनुसंधान के साथ भारतीय कृषि और अधिक सशक्त बनेगी।

