आज कृषि क्षेत्र में लगातार नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इन्हीं में से एक रोचक प्रयोग यह है कि यदि पौधों को संगीत सुनाया जाए तो उनकी वृद्धि (Growth) तेज हो सकती है।

देखिए, जब कोई मनुष्य संगीत सुनता है तो उसे अच्छा महसूस होता है। इसका कारण हमारे शरीर में डोपामाइन हार्मोन का रिलीज होना है, जो हमें खुशी और सकारात्मक ऊर्जा देता है। इसी आधार पर कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि यदि पौधों को भी हल्की ध्वनि में संगीत सुनाया जाए, तो उनकी वृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कुछ प्रयोगों में यह बताया गया है कि पौधों को ओम (ॐ) की ध्वनि या हल्का संगीत लगभग 70–80 डेसिबल की ध्वनि में सुनाना उचित माना जाता है। ध्वनि बहुत तेज भी नहीं होनी चाहिए और बहुत धीमी भी नहीं।
इस प्रयोग को सुबह के समय करना अधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि सुबह के समय पौधों के स्टोमेटा (Stomata) खुले रहते हैं। इस स्थिति में पौधे बाहरी वातावरण के प्रति अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे इस प्रकार के प्रयोगों का प्रभाव बेहतर देखने को मिल सकता है।
वैज्ञानिक प्रयोगों में, जैसे हाइड्रोपोनिक सिस्टम या प्रयोगशाला में किए जाने वाले शोधों में, पौधों की वृद्धि पर ध्वनि के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। ठीक इसी तरह हमने पहले स्पीड ब्रीडिंग तकनीक के प्रयोग में भी देखा है कि नई तकनीकों से पौधों की वृद्धि और उत्पादन में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
कुछ किसानों और शोधकर्ताओं ने यह भी अनुभव किया है कि यदि बीज से पौधा निकलने की प्रक्रिया के दौरान हल्का संगीत सुनाया जाए तो अंकुरण (Germination) की गति में थोड़ा सुधार देखा जा सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कृषि में नए-नए प्रयोग किसानों और वैज्ञानिकों को बेहतर परिणाम देने में मदद कर सकते हैं। संगीत का प्रयोग भी एक ऐसा ही रोचक प्रयोग है, जिस पर अभी और शोध चल रहे है
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