नमस्कार,
आज यदि हम समाज की वर्तमान स्थिति पर नज़र डालें, तो पाएँगे कि लगभग हर बच्चे और युवा के हाथ में मोबाइल फोन है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे अनेक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। तकनीक के क्षेत्र में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं, नई-नई एप्लीकेशन और सुविधाएँ इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। लेकिन क्या यह प्रगति हमें सही दिशा में ले जा रही है?

किसी भी चीज़ का अधिक उपयोग लाभ के बजाय नुकसानदायक बन जाता है, और आज यही स्थिति सोशल मीडिया के साथ देखने को मिल रही है।
भारत की युवा जनसंख्या और उसकी जिम्मेदारी
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है और यहाँ युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यदि किसी राष्ट्र को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना है, तो वहाँ के युवाओं का शिक्षित, कुशल और जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है।
युवा देश का भविष्य होता है। लेकिन दुखद तथ्य यह है कि इतनी बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद आज भारत में बेरोज़गारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
पढ़ाई के बाद भी बेरोज़गारी: क्यों?
आज देश में लाखों छात्र—
- बीटेक इंजीनियरिंग
- बीटेक कंप्यूटर साइंस
- बीएससी एग्रीकल्चर
- बीकॉम
- अन्य डिग्रियाँ
कर रहे हैं, लेकिन उनमें से आधे से अधिक छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद भी बेरोज़गार हैं।
प्रश्न यह है कि जब युवा पढ़-लिख रहे हैं, तो फिर नौकरी क्यों नहीं मिल रही?
इसका एक बड़ा कारण है—दिशाहीन शिक्षा और व्यावहारिक कौशल की कमी।
सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव
आज युवाओं का सबसे अधिक समय सोशल मीडिया पर बीतता है।
यूट्यूब 2005 में शुरू हुआ और आज यह करोड़ों लोगों की रोज़मर्रा की आदत बन चुका है। फेसबुक और इंस्टाग्राम भी इसी दौड़ में शामिल हैं।
कई युवा सोचते हैं कि:
- रील बनाकर पैसा आ जाएगा
- यूट्यूब चैनल से जल्दी कमाई होगी
- सोशल मीडिया से नाम और शोहरत मिलेगी
लेकिन सच्चाई यह है कि आज सोशल मीडिया पर इतना अधिक प्रतिस्पर्धा है कि सफल होना आसान नहीं है। लगभग हर घर में कोई न कोई यूट्यूब चैनल खोलकर बैठा है।
केवल डांस करने या ट्रेंड फॉलो करने से भविष्य सुरक्षित नहीं होता।
व्यूज की दौड़ और गलत जानकारी
आज कई न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया क्रिएटर केवल व्यूज के लिए भ्रामक शीर्षक और थंबनेल का उपयोग करते हैं। सामने कुछ और दिखाया जाता है और अंदर कंटेंट कुछ और होता है।
इसका परिणाम यह होता है कि:
- गलत जानकारी तेज़ी से फैलती है
- सही बातें लोगों तक नहीं पहुँचतीं
- समाज भ्रमित होता है
सोशल मीडिया का दुरुपयोग समाज के लिए खतरा बनता जा रहा है।
स्किल के नाम पर क्या सीख रहे हैं युवा?
आज “स्किल डेवलपमेंट” की बहुत चर्चा होती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई छात्र केवल डिग्री तक सीमित रह जाते हैं।
कई कॉलेज और विश्वविद्यालय:
- व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं देते
- केवल सिलेबस पूरा करवाते हैं
- छात्रों को नौकरी के लिए तैयार नहीं करते
आजकल तो कई संस्थानों में पढ़ाई भी यूट्यूब के सहारे चल रही है, जो शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
किताबों से दूरी: एक चिंताजनक संकेत
पहले छात्र किताबें पढ़ते थे, ज्ञान बढ़ाते थे, सोचने की क्षमता विकसित करते थे। आज अधिकतर युवा केवल मोबाइल स्क्रीन तक सीमित हो गए हैं।
किताबें कम पढ़ने के कारण:
- सोचने की क्षमता घट रही है
- गहराई से समझने की आदत कम हो रही है
- धैर्य और अनुशासन कमजोर हो रहा है
यह समाज के लिए खतरे की घंटी है।
शिक्षा नीति और सुधार की आवश्यकता
यदि हमें वास्तव में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, तो हमें:
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पूरी तरह निर्भरता कम करनी होगी
- प्रैक्टिकल ट्रेनिंग बढ़ानी होगी
- इंडस्ट्री से जुड़ी पढ़ाई करानी होगी
- छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना होगा
तकनीक का उपयोग सीखने के लिए होना चाहिए, न कि समय बर्बाद करने के लिए।
समाधान और सुझाव
आज के युवाओं को चाहिए कि वे:
सोशल मीडिया का सीमित और सकारात्मक उपयोग करें
केवल डिग्री नहीं, कौशल पर ध्यान देंकिताबें पढ़ने की आदत डालेंआत्मविकास पर काम करेंसमय का सही प्रबंधन करें लक्ष्य तय करके आगे बढ़ें
सरकार और शिक्षा संस्थानों को भी युवाओं के लिए रोजगारोन्मुखी योजनाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाने चाहिए।
कमाई नहीं, विचारों का माध्यम
आज हम स्वयं अपनी वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म चला रहे हैं, लेकिन इससे हमें कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं हो रहा है। इसके बावजूद हम लगातार प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि हमारा मुख्य उद्देश्य पैसा कमाना नहीं, बल्कि अपनी बात, अपने विचार और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को आप तक पहुँचाना है।
हमारे लिए सोशल मीडिया और वेबसाइट केवल एक माध्यम हैं—एक ऐसा साधन, जिसके जरिए हम लोगों तक सच्ची और उपयोगी जानकारी पहुँचा सकें। आज के समय में सोशल मीडिया विचारों को फैलाने का सबसे तेज़ तरीका बन चुका है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम इसमें पूरी तरह डूब जाएँ।
सोशल मीडिया का उपयोग उतना ही करना चाहिए, जितना आवश्यक हो। इसे अपने जीवन का लक्ष्य नहीं, बल्कि एक साधन बनाना चाहिए। जब सोशल मीडिया हमारे लक्ष्य पर हावी होने लगे, तब वह हमारे विकास में बाधा बन जाता है।
निष्कर्ष
भारत के पास सबसे बड़ी युवा शक्ति है। यदि इस शक्ति को सही दिशा मिल जाए, तो भारत विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति बन सकता है।
लेकिन यदि युवा सोशल मीडिया की दुनिया में उलझकर अपने लक्ष्य भूल गए, तो यह देश के लिए बड़ा नुकसान होगा।
आज आवश्यकता है कि युवा जागरूक बनें, सही दिशा चुनें और अपने भविष्य के साथ-साथ देश के विकास में योगदान दें।
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