नमस्कार,कृषि के क्षेत्र में आज नई-नई तकनीकें आ रही हैं और लगातार परिवर्तन हो रहे हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन साथ ही एक चिंताजनक विषय भी सामने आ रहा है लगातार बदलता तापमान।

हम अपने आसपास देख रहे हैं कि मौसम का चक्र असंतुलित हो गया है। कभी गर्मियों में असामान्य ठंड पड़ जाती है, तो कभी सर्दियों में अत्यधिक गर्मी हो जाती है। जिस समय कोहरा पड़ना चाहिए, उस समय कोहरा नहीं पड़ता, और जब आवश्यकता नहीं होती, तब अधिक कोहरा देखने को मिलता है। यह लगातार हो रहा जलवायु परिवर्तन कृषि के लिए चुनौती बनता जा रहा है।
रबी फसलों पर प्रभाव
इस समय रबी की फसलें खेतों में खड़ी हैं। विशेष रूप से गेहूं की फसल में दाना बनने की अवस्था चल रही है।
फरवरी माह में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।
अनुमान है कि मार्च में तापमान 35°C तक पहुंच सकता है।
यदि तापमान इस प्रकार बढ़ता है तो:
पौधों में नमी की कमी हो जाएगी।
मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्व पौधों तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पाएंगे।
दानों का आकार छोटा रह जाएगा।
टेस्ट वेट कम होगा।
उत्पादन घटेगा और किसान को आर्थिक नुकसान होगा।
बचाव के उपाय
- समय पर सिंचाई करें – विशेषकर दाना बनने की अवस्था में।
- पोटेशियम नाइट्रेट (KNO₃) का छिड़काव करें – 1% घोल (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करने से पौधों को तनाव से राहत मिलती है और दाना भराव बेहतर होता है।
- मल्चिंग का प्रयोग करें – इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है।
- संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।
- जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए हमें पर्यावरण संरक्षण, पेड़-पौधे लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष
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