आज हम यूजीसी के बारे में बात करते हैं। यूजीसी का पूरा नाम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग है। इसका काम देश की यूनिवर्सिटियों को मान्यता देना और यह तय करना होता है कि वहां पढ़ाई किस तरह होगी और क्या नियम होंगे।
पिछले कुछ समय से यूजीसी इसलिए चर्चा में है क्योंकि उसने विश्वविद्यालयों के लिए कुछ नए नियम बनाए हैं। ये नियम खास तौर पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों से जुड़े हुए हैं।

पहले ऐसा होता था कि अगर किसी छात्र ने झूठी शिकायत की, तो उस पर कार्रवाई होती थी, जुर्माना लगता था या सजा मिलती थी। लेकिन नए नियमों में यह व्यवस्था हटा दी गई है। अब अगर कोई एससी, एसटी या ओबीसी छात्र यह कहता है कि उसके साथ जाति के कारण भेदभाव हो रहा है
तो ऐसे में उसे जनरल वाले छात्र को इधर-उधर भटकना पड़ेगा 7 दिन के अंदर जांच हो यह कहा गया है इससे यह होगा कि कोई भी एसटी एससी ओबीसी वाला जनरल छात्र के ऊपर झूठी कार्रवाई करने में डरेगा नहीं वह क्योंकि इस पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। पहले जहां जुर्माना लगता था झूठी कार्रवाई पर अब नहीं लगेगा। अक्सर विश्वविद्यालयमे अध्यक्ष सचिव के चुनाव होते रहते हैं
अगरऐसे में जनरल वर्ग का छात्र चुनाव लड़ता है और यदि ऐसे में कोई ओबीसी एसटी एससी का छात्र उसे चुनाव लड़ने वाले छात्र के ऊपर यह यह आरोप लगता है कि इसने हमारे साथ जातिवाद भेदभाव किया है तो उस जनरल वर्ग के छात्र को इधर-उधर भटकना पड़ेगा ।
यदि किसी छात्र के अच्छे नंबर आते लता है जो जनरल वर्ग का है और पढ़ने में अच्छा है तो ऐसे यह हो सकता है कि कोई दूसरा छात्रजो एसटी एससी ओबीसी का है वह उसे जनरल वर्ग के छात्रों नीचा दिखाने लिए के उस जनरल वर्ग के छात्र के ऊपर यह आरोप लगा दे इसने हमारे साथ हमारे साथ जातिवाद भदभाव किया ऐसी में जनरल वाले छात्र को इधर-उधर उस जनरल छात्र को इधर-उधर भटकना पड़ेगा।
निष्कर्ष
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