जब हम बात करते हैं इतिहास की, तो इतिहास केवल बीते समय की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह हमें कई गहरी बातें समझने का अवसर देता है। हमें समझ में आता है 1857 की क्रांति, जिसे भारत की पहली स्वतंत्रता क्रांति भी कहा जा सकता है। वीर सावरकर ने इसे भारत की पहली क्रांति कहा था।

उसी समय उत्तर प्रदेश में झांसी की महारानी रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से अपने राज्य को बचाने के लिए वीरता से लड़ रही थीं। वहीं मंगल पांडे अंग्रेजों से देश को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। यह वह दौर था जब देश के अलग-अलग हिस्सों में असंतोष धीरे-धीरे एक बड़े विद्रोह का रूप ले रहा था।
अंग्रेजों को यह शक हो गया था कि 30 मई 1857 को एक बहुत बड़ी क्रांति होने वाली है, लेकिन यह क्रांति 10 मई 1857 को ही भड़क उठी। इस अचानक हुए विद्रोह ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी। जगह-जगह अंग्रेजों पर हमले हुए, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा, और कई स्थानों पर उनके हथियार भी छीन लिए गए।
हालाँकि इस संघर्ष में एक कड़वी सच्चाई भी सामने आई। सिंधिया परिवार अंग्रेजों की मदद कर रहा था, जिसके कारण अंग्रेज भारत से पूरी तरह बाहर नहीं हो पाए। यदि उस समय सभी भारतीय शक्तियाँ एकजुट होतीं, तो संभव है कि इतिहास की दिशा कुछ और ही होती।
फिर भी, 1857 की क्रांति ने भारतीयों के मन में स्वतंत्रता की भावना को और मजबूत किया। इस क्रांति ने यह साबित कर दिया कि भारतीय अब विदेशी शासन को चुपचाप सहने वाले नहीं हैं। भले ही यह विद्रोह तत्काल सफल न हो सका, लेकिन इसी ने आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की मजबूत नींव रखी और आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।
भारत में अंग्रेजों के शासन को व्यवस्थित करने के लिए सबसे पहले रेगुलेटिंग एक्ट 1773 लाया गया। यह अंग्रेजों द्वारा बनाया गया पहला कानून था, जिसका उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन पर नियंत्रण रखना था। इसी एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल बनाया गया और कंपनी के कामकाज में ब्रिटिश सरकार का दखल शुरू हुआ।रेगुलेटिंग एक्ट के बाद अंग्रेजों ने महसूस किया कि भारत पर शासन करने के लिए समय-समय पर नए कानूनों की आवश्यकता है। इसी क्रम में चार्टर एक्ट लाए गए।सबसे पहले चार्टर एक्ट 1813 आया, फिर चार्टर एक्ट 1833 और अंत में चार्टर एक्ट 1853 लागू किया गया।
इन चार्टर एक्टों का उद्देश्य कंपनी के शासन को और मजबूत करना तथा भारत में प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना था।इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि पहले रेगुलेटिंग एक्ट आया और उसके बाद चार्टर एक्ट लागू किए गए। यही क्रम आगे चलकर अंग्रेजी शासन की नींव बना, जिसे 1857 की क्रांति ने गहराई से हिला दिया।
निष्कर्ष
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