आज की दुनिया तेजी से बदल रही है। हर देश चाहता है कि उसकी आवाज़ सुनी जाए और उसका विकास हो। ऐसे समय में BRICS जैसे संगठन बहुत अहम हो जाते हैं। इस बार BRICS इसलिए और भी ज़्यादा चर्चा में है, क्योंकि इसकी अध्यक्षता कर रहा है। यानी इस बार भारत BRICS का नेतृत्व कर रहा है। यह भारत के लिए गर्व की बात भी है और बड़ी जिम्मेदारी भी।

BRICS क्या है?
BRICS पाँच देशों का एक समूह है।
इन देशों के नाम हैं—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका।
इन पाँचों देशों में एक बात समान है। ये सभी देश कभी विकासशील थे और आज तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इन देशों की आबादी बहुत बड़ी है और इनकी अर्थव्यवस्था भी लगातार मजबूत हो रही है। दुनिया की लगभग आधी आबादी BRICS देशों में रहती है। इसलिए जब ये देश मिलकर कोई बात कहते हैं, तो पूरी दुनिया उसे ध्यान से सुनती है।
BRICS का मतलब यह नहीं है कि ये देश किसी के खिलाफ हैं। इसका मतलब है कि ये देश मिलकर काम करना चाहते हैं, ताकि दुनिया में संतुलन बना रहे और सिर्फ कुछ ही देशों का दबदबा न हो।
BRICS बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
पहले दुनिया के ज़्यादातर बड़े फैसले कुछ ही ताकतवर देशों द्वारा लिए जाते थे।
गरीब और विकासशील देशों की समस्याओं पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता था।
कई देशों को लगता था कि:
- उनके साथ व्यापार में भेदभाव होता है
- कर्ज़ की शर्तें कठिन होती हैं
- उनकी बात अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कम सुनी जाती है
इसी सोच से BRICS की शुरुआत हुई। विचार यह था कि अगर बड़े विकासशील देश आपस में मिलकर काम करें, तो वे अपने हितों की रक्षा कर सकते हैं और एक-दूसरे की मदद भी कर सकते हैं।
भारत के लिए BRICS क्यों खास है?
भारत खुद एक विकासशील देश है। भारत ने गरीबी, बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं को बहुत करीब से देखा है। इसलिए भारत बाकी देशों की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझता है।
जब भारत BRICS की अध्यक्षता करता है, तो इसका मतलब है कि:
- बैठकों की अगुवाई भारत करता है
- किन मुद्दों पर चर्चा होगी, यह भारत तय करता है
- सभी देशों को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी भारत की होती है
यह सिर्फ एक पद नहीं है, बल्कि नेतृत्व दिखाने का मौका है।
इस बार भारत BRICS में क्या करना चाहता है?
भारत चाहता है कि BRICS सिर्फ बातें करने वाला मंच न रहे, बल्कि काम करने वाला मंच बने। भारत की सोच बहुत साफ और सरल है।
1. आपसी व्यापार बढ़े
भारत चाहता है कि BRICS देश आपस में ज़्यादा सामान खरीदें और बेचें। जब देश आपस में व्यापार करते हैं, तो:
- उद्योग बढ़ते हैं
- रोजगार मिलता है
- अर्थव्यवस्था मजबूत होती है
इससे हर देश के आम लोगों को फायदा होता है।
2. अपनी मुद्रा में व्यापार
आज ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर में होता है।
भारत चाहता है कि BRICS देश आपस में अपनी-अपनी मुद्रा में भी व्यापार करें।
इससे:
- किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी
- लेन-देन सस्ता और आसान होगा
- आर्थिक दबाव घटेगा
यह सोच भारत लंबे समय से आगे बढ़ा रहा है।
3. विकासशील देशों की मदद
भारत चाहता है कि BRICS सिर्फ पाँच देशों तक सीमित न रहे।
दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो आज भी गरीबी और कर्ज़ से जूझ रहे हैं।
भारत चाहता है कि:
- ऐसे देशों को सस्ता कर्ज़ मिले
- तकनीक और निवेश मिले
- विकास के नए रास्ते खुलें
यही असली सहयोग है।
डिजिटल इंडिया का अनुभव BRICS में
भारत ने पिछले कुछ सालों में डिजिटल क्षेत्र में बहुत तरक्की की है।
आज भारत में:
- मोबाइल से पैसे भेजे जाते हैं
- सरकारी काम ऑनलाइन होते हैं
- बैंकिंग आसान हो गई है
भारत चाहता है कि यह अनुभव BRICS देशों के साथ साझा किया जाए। इससे:
- भ्रष्टाचार कम हो सकता है
- आम आदमी का समय बचेगा
- सेवाएँ तेज़ होंगी
डिजिटल सहयोग भारत की बड़ी प्राथमिकता है।
युवाओं और रोजगार पर भारत का ज़ोर
BRICS देशों में युवाओं की संख्या बहुत ज़्यादा है।
अगर युवाओं को काम नहीं मिला, तो विकास रुक जाएगा।
भारत चाहता है कि BRICS मंच पर:
- कौशल विकास
- स्टार्टअप
- रोजगार
जैसे मुद्दों पर गंभीर काम हो।
भारत का मानना है कि युवा सिर्फ नौकरी ढूँढने वाले न बनें, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।
शिक्षा और स्वास्थ्य: असली विकास
भारत मानता है कि विकास सिर्फ पैसा कमाने से नहीं होता।
अगर लोग पढ़े-लिखे और स्वस्थ नहीं होंगे, तो देश आगे नहीं बढ़ सकता।
भारत BRICS के मंच पर:
- शिक्षा में सहयोग
- रिसर्च
- स्वास्थ्य सेवाओं
पर भी ज़ोर दे रहा है।
इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा।
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रही है।
भारत मानता है कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति को नुकसान पहुँचाकर नहीं।
भारत BRICS में:
- स्वच्छ ऊर्जा
- सौर ऊर्जा
- पर्यावरण संरक्षण
जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करना चाहता है।
क्या BRICS किसी के खिलाफ है?
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है।
इसका जवाब बहुत साफ है—नहीं।
BRICS किसी देश या संगठन के खिलाफ नहीं है।
यह सिर्फ यह चाहता है कि दुनिया में संतुलन बना रहे और हर देश को आगे बढ़ने का मौका मिले।
भारत हमेशा संवाद और सहयोग में विश्वास करता है, टकराव में नहीं।
भारत की बढ़ती पहचान
BRICS की अध्यक्षता से भारत की छवि और मजबूत होती है।
दुनिया यह देखती है कि भारत:
- जिम्मेदारी निभा सकता है
- सबको साथ लेकर चल सकता है
- समाधान देने की सोच रखता है
यह भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।
चुनौतियाँ भी हैं
यह रास्ता आसान नहीं है।
हर BRICS देश की अपनी सोच और अपने हित हैं।
भारत के सामने चुनौती है कि वह:
- सबको साथ रखे
- मतभेदों को बातचीत से सुलझाए
- संतुलन बनाए रखे
लेकिन भारत का इतिहास रहा है कि उसने हमेशा शांतिपूर्ण रास्ता चुना है।
आम आदमी के लिए इसका मतलब
अब सवाल आता है—आम आदमी को इससे क्या फायदा?
धीरे-धीरे इसका असर:
- रोजगार पर
- व्यापार पर
- तकनीक पर
- देश की अर्थव्यवस्था पर
पड़ता है।
जब देश मजबूत होता है, तो उसका फायदा अंत में आम नागरिक तक पहुँचता है।
निष्कर्ष: भारत की भूमिका क्यों अहम है
इस बार BRICS की अध्यक्षता भारत के लिए सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि एक परीक्षा भी है।
यह मौका है यह दिखाने का कि भारत सिर्फ बातें नहीं करता, बल्कि काम भी करता है।
सरल शब्दों में कहें तो—
भारत इस बार BRICS को सही दिशा देने की कोशिश कर रहा है,
ऐसी दिशा जिसमें सहयोग हो, संतुलन हो और सबका विकास हो।
अगर भारत इसमें सफल होता है, तो इसका असर सिर्फ BRICS तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया महसूस करेगी।
निष्कर्ष
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