नमस्कार, आप कभी ना कभी ट्रेन में बैठे होंगे और ट्रेन का टिकट भी बुक किया होगा। कई लोग ट्रेन का टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक करते हैं तो कई लोग ऑफलाइन माध्यम से। पहली बार ट्रेन भारत में 16 अप्रैल 1853 को चली थी, जो बंबई (अब मुंबई) के बोरी बंदर स्टेशन से ठाणे के बीच चलाई गई थी। यह ट्रेन दोपहर 3:35 बजे बोरी बंदर (अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) से रवाना हुई थी। अगर बात करें बड़े रेलवे स्टेशनों की तो हावड़ा जंक्शन प्रमुख और व्यस्त स्टेशनों में से एक है। आज हम आपको रेलवे के कुछ ऐसे नियम बताएंगे जो आपको यात्रा करते समय पता होने चाहिए, क्योंकि यह हर व्यक्ति के लिए जानना जरूरी है। इसलिए हम सरल भाषा में आपको यह जानकारी दे रहे हैं।
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रेलवे के कुछ नियम
यदि आप ट्रेन का टिकट लेना भूल गए हैं और अनारक्षित (सामान्य) डिब्बे में यात्रा कर रहे हैं, तो केवल प्लेटफॉर्म टिकट के आधार पर यात्रा करना मान्य नहीं है। प्लेटफॉर्म टिकट सिर्फ स्टेशन पर प्रवेश के लिए होता है, यात्रा के लिए नहीं। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत टीटीई से संपर्क करना चाहिए। वह आपसे निर्धारित किराया और नियम अनुसार अतिरिक्त शुल्क लेकर टिकट बना सकता है।
यदि आपके पास कोई टिकट नहीं है तो टीटीई आपसे उस स्टेशन से किराया वसूल सकता है जहां से ट्रेन शुरू हुई है या जहां से आपको बिना टिकट पाया गया है, साथ ही जुर्माना भी लगा सकता है।यदि प्लेटफॉर्म टिकट भी नहीं है और आप बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं तो आपसे किराया और लगभग ₹250 या उससे अधिक जुर्माना (स्थिति के अनुसार) लिया जा सकता है।
रेलवे अधिनियम की धारा 137 के तहत बिना टिकट यात्रा दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना या सजा का प्रावधान है।वेटिंग टिकट दो प्रकार के होते हैं — ऑनलाइन और ऑफलाइन। ऑनलाइन (ई-टिकट) वेटिंग कन्फर्म न होने पर यात्रा की अनुमति नहीं होती और टिकट स्वतः रद्द हो जाता है। काउंटर से लिया गया वेटिंग टिकट होने पर आप अनारक्षित डिब्बे में यात्रा कर सकते हैं, लेकिन आरक्षित डिब्बे में यात्रा की अनुमति नहीं होती। सीट खाली होने पर टीटीई नियम अनुसार सीट दे सकता है।
यदि आपकी ट्रेन छूट जाती है और आपके पास कन्फर्म टिकट है, तो चार्ट बनने के बाद आपकी सीट कुछ स्टेशनों तक सुरक्षित रह सकती है, लेकिन उसके बाद वह किसी अन्य यात्री को आवंटित की जा सकती है।यदि आपके पास पैसे भी नहीं हैं और टिकट भी नहीं है, तो रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या संबंधित अधिकारी आप पर कार्रवाई कर सकते हैं। रेलवे अधिनियम की धारा 137 के तहत आपको मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है, जहां जुर्माना या सजा हो सकती है।
यदि आप नशे की हालत में यात्रा कर रहे हैं या अन्य यात्रियों को परेशान कर रहे हैं, तो रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत आप पर कार्रवाई हो सकती है, जिसमें जुर्माना या सजा का प्रावधान है।यदि आपने बिना उचित कारण चेन खींची, तो रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत आप पर कार्रवाई हो सकती है।यदि आप ट्रेन की छत पर बैठकर यात्रा कर रहे हैं, तो यह अपराध है और धारा 156 के तहत जुर्माना या सजा हो सकती है।यदि आप अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं या बदमाशी करते हैं, तो धारा 145 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।बच्चों के टिकट संबंधी नियम — 1 वर्ष से कम आयु के शिशु के लिए टिकट आवश्यक नहीं है।
1 से 5 वर्ष तक के बच्चे बिना अलग सीट के निःशुल्क यात्रा कर सकते हैं।
5 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए आधा किराया (नियम अनुसार) देना होता है यदि अलग सीट ली जाती है।
12 वर्ष से अधिक आयु के सभी बच्चों/व्यक्तियों के लिए पूरा टिकट देना आवश्यक है।
स्टूडेंट के लिए सुविधा
कुछ परीक्षाओं या शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए छात्रों को निर्धारित नियमों के तहत रियायत मिलती है। इसके लिए मान्य प्रमाण पत्र और रेलवे द्वारा स्वीकृत फॉर्म आवश्यक होता है। छूट की दर परीक्षा और श्रेणी के अनुसार तय होती है। सामान्य रूप से टीटीई किसी भी समय टिकट जांच सकता है; ऐसा कोई निश्चित समय नहीं है कि वह 10 बजे से 6 बजे तक टिकट चेक नहीं करेगा।
निष्कर्ष
उम्मीद है हमारे द्वारा बताई गई जानकारी आपको समझ में आ गई होगी। रेलवे एक सार्वजनिक संपत्ति है, इसलिए यात्रा करते समय नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

