नमस्कार दोस्तों,जब हम जंगलों और जंगली जानवरों को बचाने की बात करते हैं, तो भारत सरकार द्वारा इस दिशा में किए गए प्रयास बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं।
सन 1972 में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम बनाया गया। इसके बाद 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा जंगलों और पेड़ों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए गए।
इसी समय चिपको आंदोलन हुआ, जिसमें गौरा देवी और सुंदरलाल बहुगुणा जैसे महान व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आंदोलन का उद्देश्य पेड़ों की कटाई को रोकना और प्रकृति की रक्षा करना था।सन 1992 में हाथी परियोजना की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत हाथियों के संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाए गए। इसी दौरान वन्य जीव संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए गए।

सन 1936 में उत्तराखंड स्थित कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना हुई, जिसे पहले हैली नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता था।
वर्तमान समय में केरल के कन्नूर जिले में स्थित अरालम वन्यजीव अभयारण्य भारत का प्रमुख तितली अभयारण्य है, जहाँ लगभग 260 से अधिक प्रजातियों की तितलियाँ पाई जाती हैं।
आज तितलियों के संरक्षण के लिए भी लगातार कार्य किया जा रहा है।इसी प्रकार, रामसर सम्मेलन के अंतर्गत भारत में आर्द्रभूमियों की संख्या पहले 96 थी, जो अब बढ़कर 98 हो गई है। इस सम्मेलन की शुरुआत लगभग 1971 में हुई थी। इसका नाम ईरान के रामसर नामक स्थान पर हुए समझौते के कारण पड़ा।
आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए आज विश्व की कई सरकारें मिलकर कार्य कर रही हैं।
निष्कर्ष
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