नमस्कार दोस्तों। कुछ समय पहले हमने देखा कि चांदी का रेट कभी बहुत ऊपर जा रहा था, तो कभी अचानक नीचे गिर रहा था। हमने पहले भी बताया था कि शेयर मार्केट में बड़ा बदलाव आने वाला है, और बाद में हमने देखा कि शेयर बाजार लगातार ऊपर-नीचे होता रहा।
इसी तरह, हमने अपने एक लेख में सोने के रेट के बारे में भी बात की थी कि कैसे सोना ऊपर-नीचे हो रहा है। उसी समय चांदी के भाव में भी तेज़ी आई थी, लेकिन फिर अचानक चांदी का रेट गिरने लगा। आज हम इसी के कारणों के बारे में बात करेंगे।
चांदी में तेजी क्यों आई थी?
कुछ समय पहले लोगों ने डॉलर और शेयर बाजार में पैसा लगाने के बजाय सोने और चांदी में निवेश करना शुरू कर दिया था। कई लोगों ने शेयर मार्केट से पैसा निकालकर सोना और चांदी खरीदना शुरू किया।
इसके बाद लोगों ने बिटकॉइन में भी खूब निवेश किया। जब लोग एक साथ सोना, चांदी और बिटकॉइन खरीदने लगे, तो इनकी मांग बढ़ गई और इनके दाम ऊपर जाने लगे।
इसी वजह से उस समय चांदी और सोने के भाव काफी बढ़ गए थे।
फिर चांदी का रेट नीचे क्यों गिरा?
बाद में हमने देखा कि चांदी का रेट धीरे-धीरे गिरने लगा। इसके पीछे कई कारण थे।
सबसे पहला कारण महंगाई से जुड़ा है। भारत में महंगाई 2% से 6% के बीच रहना सही माना जाता है। जब महंगाई इस सीमा में रहती है, तो अर्थव्यवस्था संतुलित रहती है।
महंगाई को नियंत्रित करने का काम भारत में भारतीय रिजर्व बैंक करता है। इसी तरह अमेरिका में भी महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है।
उस समय अमेरिका में महंगाई बढ़ने लगी थी, क्योंकि अमेरिका ने कई देशों पर टैरिफ (कर) लगा दिए थे। इससे आयात होने वाला सामान महंगा हो गया और महंगाई बढ़ने लगी।
निवेशकों ने चांदी से पैसा क्यों निकाला?
जब अमेरिका में नए अर्थशास्त्री को जिम्मेदारी दी गई और सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण के संकेत दिए, तो निवेशकों को भरोसा होने लगा कि हालात सुधरेंगे।
इसके बाद लोगों ने धीरे-धीरे चांदी और सोने से पैसा निकालना शुरू कर दिया और दूसरे विकल्पों में निवेश करने लगे।
जब लोग चांदी बेचने लगे, तो उसकी मांग कम हो गई और सप्लाई बढ़ गई। इसी कारण चांदी का भाव गिरने लगा।
सप्लाई का भी बड़ा रोल
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सबसे जरूरी चीज़ होती है सप्लाई को सही रखना। अगर बाजार में सामान की सप्लाई सही तरीके से बनी रहती है, तो कीमतें अपने आप कंट्रोल में रहती हैं।
जब सप्लाई और मांग में संतुलन बन जाता है, तो महंगाई भी कम होती है और चांदी जैसे धातुओं के दाम स्थिर हो जाते हैं।
निष्कर्ष
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