अक्सर हम रामसर के बारे स्थल के बारे में सुना करते हैं क्या आपने कभी रामसर के बारे में सुना है नहीं सुना है तो आंध्र भूमि के बारे में तो आपने सुना होगा आर्द्रभूमि(wetlands) के बारे मे सुना होगा यह हुआ क्षेत्र होता है जो जल के जमाव में रहता है यानी पूरी तरीके से जल से ढका हुआ रहता है यहां दुर्बल मछली पौधे पाए जाते हैं दलदल नदियां आदि पाई जाती है।
भारत के रामसर स्थलों की संख्या 98 हो गई है यह जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम और गर्व की बात है।

दो ने रामसर स्थल जो ने मिले हैं पटना पक्षी अभ्यारण एटा उत्तर प्रदेश और दूसरा है छारी-ढांड वेटलैंड (Chari-Dhand Wetland) – कच्छ जिला, गुजरात।
आर्द्रभूमि उन भूमियों को कहते हैं
जहां मरुस्थली मिट्टी और अधिकतर भाग जल से घिरा हुआ हो चाहे कृत्रिम माध्यम से किया हो या प्राकृतिक माध्यम से हो उसे आद्र भूमि कहा जाता है ज्यादातर 6 मी यदि किसी भूमिया पानी का स्तर है तो उसे भी आर्द्र भूमि की श्रेणी में रखा जा सकता है आप रामसर के बारे में आपको कहानी सुनाते हैं
देखिए रामसर ईरान की एक जगह है जहां 1960 के दशक में यह देखा गया कि इन भूमियों को बचाना बहुत जरूरी है इसके लिए मैंने प्रयोग किए जाने लगे नए-नए नियम बने और ईरान में एक रामसर एक जगह है जहां एक मीटिंग होती है जहां इन भूमियों को बचाने के लिए काम चल रहा था और 2 फरवरी 1971 को रामसर को अपनाया गया प्रभावित हुआ 21 दिसंबर 1975 से।
क्योंकि आर्द्रभूमि को बचाने से जैव विविधता भी बचेगी क्योंकि इन आंध्र भूमियों में अधिकतर ऐसे पेड़ पौधे हैं ऐसे जानवर हैं जो बहुत ही कम बचे हैं उनके बचने के लिए ऐसे कामों को हमें और बढ़ाना होगा और प्रभावी बनानाहोगा।
निष्कर्ष
उम्मीद करते हमारे द्वारा बताई गई जानकारी आपको समझ में आ गईहोगी यदि कोई सवाल है तो आप कमेंट कर सकते हैं।
देवभूमि उत्तराखंड: विकास के दावे, खाली गांव और पलायन की सच्चाई
उत्तराखंड का इतिहास क्या है|(What is the history of Uttarakhand)

