जब हम कृषि के क्षेत्र के बारे में पढ़ते हैं, तो अक्सर कृषि के छात्रों को प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (Plant Growth Regulators) के बारे में जानकारी दी जाती है।
प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर ऐसे प्राकृतिक रसायन (हार्मोन) होते हैं जो पौधों की वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें फाइटोहार्मोन (Phytohormones) भी कहा जाता है। ये बहुत कम मात्रा में भी प्रभावी होते हैं।
मुख्य पौध हार्मोन हैं

ऑक्सिन (Auxin), जिबरेलिन (Gibberellin), साइटोकिनिन (Cytokinin), एथिलीन (Ethylene) और एब्सिसिक अम्ल (Abscisic Acid – ABA)
ये हार्मोन पौधों के शारीरिक विकास, फल निर्माण, पत्तियों के गिरने (abscission) आदि प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
Auxin (ऑक्सिन)
इस हार्मोन की खोज Charles Darwin द्वारा किए गए प्रयोगों से संबंधित है।
यह कोशिकाओं की लंबाई (cell elongation) बढ़ाता ह
जड़ और तने की वृद्धि में सहायक होता है
Apical dominance बनाए रखता है
Gibberellin (जिबरेलिन)
इसकी खोज 1926 में हुई थी।
तने की लंबाई बढ़ाता है
बीज अंकुरण (seed germination) में मदद करता है
फूल आने और पत्तियों की वृद्धि में सहायक
Cytokinin (साइटोकिनिन)
कोशिका विभाजन (cell division) को बढ़ाता है
पत्तियों को हरा बनाए रखता है
Ethylene (एथिलीन)
यह एकमात्र गैसीय हार्मोन है
फलों को पकाने में मदद करता है
पत्तियों के गिरने में भूमिका निभाता है
Abscisic Acid (ABA) (एब्सिसिक अम्ल)
पौधों की वृद्धि को रोकने वाला हार्मोन
तनाव (stress) की स्थिति में मदद करता है
बीज के सुप्तावस्था (dormancy) को बनाए रखता है
निष्कर्ष
उम्मीद है यह जानकारी आपको समझ में आई होगी। अगर आपका कोई सवाल है तो कमेंट करके जरूर पूछें
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