रानी लक्ष्मीबाई जिनके बारे में अक्सर हम इतिहास में पढ़ाई करते हैं 1857 की क्रांति जो भारत की पहली स्वतंत्रता क्रांति थी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली रानी लक्ष्मीबाई का जीवन कई कठिनाइयां गिरा हुआ था उन कठिनाइयों से उन्होंने लाडा अक्सर हम जब बात करते हैं भारत की स्वतंत्रता की तो हम कई महापुरुषों को भूल जाते हैं जैसे कि वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस, मंगल पांडे भगत सिंह रानी लक्ष्मीबाई चंद्रशेखर आजाद जैसे कई महापुरुषों ने भारत को स्वतंत्र करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जब हम बात करते हैं
चोरा चोरा कांड की जब हम बात करते हैं हिंदुत्व की जब हम बात करते हैं 1857 की और जब हम बात करते हैं तो हमारे सामने कई महापुरुषों का नाम आता है जिनका कर्तव्य मात्र एक था भारत की आजादी जिनका मकसद सिर्फ एक था भारत को आजाद करना जिनका मकसद सिर्फ एक था सभी को स्वतंत्रता दिलाना। लेकिन आज की युवा पीढ़ी इन विषयों पर ध्यान नहीं देती है वह कहती हमें इससे क्या मतलब लेकिन स्वतंत्रता क्या होती है स्वतंत्रता किसे कहते हैं यह कभी उससे पूछिए स्वतंत्रता का मतलब पता हो जिसे यह पता हो कि अपने लिए कैसे लड़ा जाता है जिसे यह पता हो कि गलत के खिलाफ कैसे बोला जाता है । सबसे बड़ा धर्म देश की सुरक्षा है सबसे बड़ा धर्म देश के प्रति निष्ठा है सबसे बड़ा धर्म देश के लिए जीना है यही हमें इन महापुरुष ने बताया अक्सर हम कई महापुरुषों के बारे में पढ़ना भूल जाते हैं

सूर्य सेन जो बंगाल के एक प्रसिद्ध महापुरुष जिन्होंने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए वीर सावरकर जिन्होंने दो बार कला पानी की सजा हुई थी मंगल पांडे जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपना योगदान दिया रानी लक्ष्मीबाई जिन्होंने 1857 की क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1858 में जो वीरगति को प्राप्त हो गई आज हम आपको रानी लक्ष्मी बाई के जीवन के बारे में संपूर्ण जानकारी देने देने वाले हैं।
रानी लक्ष्मी बाई का जीवन
लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 (कुछ स्रोतों के अनुसार 1835) को वाराणसी के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
बचपन का नाम: मणिकर्णिका तांबे (प्यार से उन्हें ‘मनु’ कहा जाता था)।
पिता: मोरोपंत तांबे (बिठूर के पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेवा में थे)।
माता: भागीरथी सप्रे (एक सुसंस्कृत और बुद्धिमान महिला)।
शिक्षा: मनु का बचपन अन्य लड़कियों से अलग था। उन्होंने शास्त्रों की शिक्षा के साथ-साथ शस्त्र विद्या (तलवारबाजी, घुड़सवारी और मल्लखंब) में भी निपुणता हासिल की। पेशवा उन्हें ‘छबीली’ कहकर बुलाते थे।
विवाह और पारिवारिक दुख
विवाह: सन् 1842 में मनु का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ, जिसके बाद उनका नाम ‘लक्ष्मीबाई’ पड़ा।
पुत्र वियोग: 1851 में उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गई।
दत्तक पुत्र: राजा गंगाधर राव ने अपने निधन (1853) से पहले दामोदर राव को गोद लिया, लेकिन अंग्रेजों ने इसे उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया।
फिर जब अंग्रेजों ने दामोदर राव को उनका उत्तराधिकारी मान्या से मना कर दिया और वह झांसी कब्जा करने की सोच रहे थे लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी की जनता के लिए अपनी राज्य को बचाने के लिए अंग्रेजों से लड़ा।
अंग्रेज 17वीं में ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए भारत में आए थे। अपना व्यापार करने लेकिन धीरे-धीरे यह कब्जा करने लग गए।
1857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध किया उन्होंने कहा मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी 14 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हो गई।
निष्कर्ष
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