यह सवाल आज हर आम नागरिक के मन में है कि नोएडा प्रशासन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज को बचाने में नाकाम रहा या फिर बचाने का प्रयास ही नहीं किया गया?

क्योंकि जो तस्वीर सामने आई है, वह यही बताती है कि प्रशासन में बैठे अधिकारी पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
नोएडा, जो गौतम बुद्ध नगर जिले के अंतर्गत आता है, वहां एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो जाती है। युवराज की कार करीब 20 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर जाती है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उस सड़क पर
कोई बैरिकेड नहीं था,
कोई लाइट नहीं थी,
और कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं था।
स्पष्ट है कि यह हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही और गलती का नतीजा है, जिसकी वजह से एक युवा की जान चली गई।
इस पूरे मामले में यह भी सामने आता है कि घटना के समय जिले की जिलाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचीं। यह बात लोगों को सोचने पर मजबूर करती है कि वह जिलाधिकारी ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं।
यह कहना किसी पर आरोप लगाना नहीं है, लेकिन सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जिले की सबसे बड़ी अधिकारी ही मौके पर नहीं पहुंचतीं, तो जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
और सवाल यहीं खत्म नहीं होते।
मौके पर पुलिस और प्रशासन के कई लोग मौजूद थे,
फिर भीकिसी ने युवराज को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की?
कोई पानी में क्यों नहीं उतरा?
क्या डर था कि पानी ठंडा है?
क्या डर था कि पानी में उतरेंगे तो कुछ हो जाएगा?
अगर प्रशासन और पुलिस सिर्फ डर की वजह से खड़े रहे, तो यह कर्तव्य से भागना है।
जब अधिकारी ही ऐसी लापरवाही करेंगे, ऐसे काम करेंगे, तो फिर आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?
आज युवराज नहीं है, लेकिन यह घटना हमें सोचने पर विवश करती है कि क्या हमारी जान की कीमत इतनी सस्ती हो गई है?
यह सिर्फ कहने की बात नहीं होनी चाहिए।
जरूरत है किइस मामले की सच्चाई सामने आए,
जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो,और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।क्योंकि अगर आज सवाल नहीं पूछे गए, तो कल कोई और युवराज किसी गड्ढे में गिर सकता है।
जिस प्रशासन की गाड़ियों और व्यवस्था में भारी गलती हुई है, उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।यह कार्रवाई इसलिए ज़रूरी है ताकि ऐसे अधिकारियों को यह समझ में आए कि लापरवाही की कीमत किसी इंसान की जान हो सकती है।
अगर आज कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो कल भी अधिकारी इसी तरह अपनी जिम्मेदारी से बचते रहेंगे।सड़क पर बिना बैरिकेड, बिना लाइट और बिना चेतावनी छोड़ देना कोई छोटी गलती नहीं है, बल्कि सीधी जानलेवा लापरवाही है।यह सिर्फ कहने की बात नहीं होनी चाहिए,बल्कि दोषी अधिकारियों को सज़ा मिलनी चाहिए,ताकि भविष्य में कोई और निर्दोष व्यक्ति प्रशासन की लापरवाही का शिकार न बने।जब तक जिम्मेदार लोगों पर सख़्त कार्रवाई नहीं होगी,तब तक ऐसी घटनाएँ रुकने वाली नहीं हैं।
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निष्कर्ष
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