• February 2, 2026 6:58 pm

    भारत में पशुपालन और राजस्थान की स्थिति

    आज हम कृषि के क्षेत्र में भारत लगातार तरीके कर रहा रहा है किसी से समय में हम दूध के उत्पादन बहुत एक कम कर रहे थे लेकिन एक में ऐसा भी आया जब हमें दूध के उत्पादन को इतना बढ़ा दिया कि विश्व में आज भारत दूध उत्पादन में पहली रैंक पर है। लगातार भारत कृषि के के क्षेत्र में लगतार नई-नई तकनीकेला रहा है जिसके कारण कृषि क्षेत्र का विकास हो रहा है।

    20वीं पशुगणना


    वर्ष 1919–20 से देश में प्रत्येक 5 वर्ष में पशुगणना की जाती है।


    इसमें सभी पालतू पशु एवं जानवरों की कुल गणना की जाती है।


    स्वतंत्रता के बाद प्रथम पशुगणना 1951 में की गई।
    जबकि पहली पशुगणना 1919 में की गई।


    भारत का कुल दूध उत्पादन एवं भैंसों की संख्या में विश्व में प्रथम स्थान है।


    भारत विश्व में दूध उत्पादन में पहला स्थान रखता है।
    भारत में सर्वाधिक गाय, भैंस पाई जाती हैं।


    20वीं पशुगणना रिपोर्ट के अनुसार कुल दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 24.6% है।


    श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड)


    1970 में NDDD के द्वारा श्वेत क्रांति की शुरुआत की गई।


    चरण

    • प्रथम चरण – 1970–81
    • द्वितीय चरण – 1981–85
    • तृतीय चरण – 1985–1996
    • विश्व दुग्ध दिवस – 1 जून


    राजस्थान में पशुपालन की स्थिति (राष्ट्रीय स्तर पर)


    भेड़ों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।


    भैंसों की जनसंख्या के आधार पर राजस्थान देश में द्वितीय स्थान पर है।


    भेड़ की संख्या के मामले में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।


    बकरियों की संख्या के आधार पर राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।


    राजस्थान की गायों में थारपारकर, साहीवाल, गिर आदि पाई जाती हैं।


    घोड़ों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में तृतीय स्थान पर है।


    ऊँट (Camel) की संख्या में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।


    देश के लगभग 84% ऊँट राजस्थान में पाए जाते हैं।


    20वीं राष्ट्रीय पशुगणना 2019


    20वीं राष्ट्रीय पशुगणना 2019 के अनुसार राजस्थान में


    भेड़ों की संख्या में 34.69% की कमी हुई है।वर्ष 2012 में राजस्थान में 3.26 लाख ऊँट थे,


    जो वर्ष 2019 में घटकर 2.13 लाख रह गए।
    राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र के अनुसारऊँट की संख्या में निरंतर कमी हो रही है।


    पशुपालन से लाभ


    बेरोजगारी में कमी


    कृषि और पशुपालन के संसाधनों का अधिक उपयोग
    गरीबी की समस्या में कमी


    ऊँटों का अवैध रूप से वध


    पशुओं की उचित देखभाल में कमी


    G.V.A (Gross Value Added)


    यदि 10 लीटर दूध बेचा जाए = लगभग 14 लाख
    यदि 4 लाख का खर्च हो जाए → शेष S.V.A होगा

    निष्कर्ष

    उम्मीद करतेहमारे द्वारा बताइए बताई गई जानकारी आपको समझ में आ गई होगी यदि कोई सवाल है तो कमेंट करें अधिक जानकारी के लिए आप हमें इमेज भी कर सकते हैं

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