नमस्कार साथियों जैसे कि आप जानते हैं कि आज भारत सरकार के द्वारा आर्थिक सर्वे पेश किया गया 1 फरवरी को बजट आना है भारतक 212 केंद्रीय बजट के बारे में वार्षिक वितरण के बारे में जानकारी दी गई। उसे बचत की जो नीति होगी उसका आधार आर्थिक सर्वे के जरिए बताया जाता है 1950 से 1951 के बीच का जो समय था उसे वक्त बजट और आर्थिक बजट को साथ में पेश किया जाता था1964 मैं बजट को अलग और केंद्र आर्थिक सर्वे को अलग पेश किया जाता है। इसलिए अलग किया गया क्योंकि आर्थिक रुझान को सही मूल्यांकन किया जा सके । पहले रेलवे बजट फिर उसके बाद आर्थिक सर्वे और फिरउसके बाद बजट आया करता था। 1964 के बाद पहले रेलवे बजट आता था फिर आर्थिक सर्व आता आता था और भी उसके उसके बाद बजट आता है लेकिन 2017-18 के रेलवे बजट और केंद्रीय बजट को एक साथ पेश किया जाता है और पहले आर्थिक सर्वे आ जाता है । आर्थिक सर्वे वित्त मंत्रालय बनता है बजट भी वित्त वित्त मत्रालय के अंदर आर्थिक कार्य विभाग के अर्थशास्त्र सभाग उनकी सहायता से मुख्य आर्थिक सलाहकार आर्थिक सर्वे बनाते हैं

अभी भारत के आर्थिक सर्वे मुख्य सलहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन है
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 भारत सरकार द्वारा हर साल बजट से पहले प्रस्तुत किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा की जानकारी दी जाती है। इस सर्वेक्षण के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में भी इसमें अच्छी वृद्धि देखने को मिलेगी। वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है। IMF और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी भारत की आर्थिक प्रगति पर भरोसा जताया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि देश की अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है।
सरकार ने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया है। वित्त वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा 4.8 प्रतिशत रहा, जो पहले के अनुमान से कम है। वहीं वित्त वर्ष 2026 के लिए सरकार ने इसे घटाकर 4.4 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है। इससे यह पता चलता है कि सरकार खर्च और आय के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास कर रही है, ताकि देश पर कर्ज का बोझ कम हो और आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि सरकार ने कर प्रणाली और नीतियों में कई बड़े सुधार किए हैं। इनकम टैक्स के नए और सरल सिस्टम को लागू किया गया है, जिससे आम लोगों को टैक्स भरने में आसानी हो रही है। GST व्यवस्था में भी सुधार किए गए हैं ताकि व्यापारियों को राहत मिले और व्यापार करना आसान बने। इसके अलावा विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए FDI नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे भारत में निवेश बढ़ रहा है। दिवालियापन कानून में भी सुधार किया गया है ताकि कंपनियों की वित्तीय समस्याओं का जल्दी समाधान हो सके।
सर्वेक्षण के अनुसार भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया गया है। वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद भारत ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी है और नए बाजारों में अपनी पकड़ बढ़ाई है।
मुद्रास्फीति यानी महंगाई को लेकर भी सर्वेक्षण में सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। RBI के अनुसार महंगाई दर धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है और इसके 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब रहने की उम्मीद है। दिसंबर में यह लगभग 6 प्रतिशत और मार्च में करीब 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इससे आम लोगों को राहत मिलने की संभावना है और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
सरकार ने बुनियादी ढांचे और पूंजीगत खर्च पर भी विशेष ध्यान दिया है। वित्त वर्ष 2022 में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर पर 5.93 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, वहीं 2026 तक इसे बढ़ाकर लगभग 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह निवेश भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है
विनिर्माण क्षेत्र यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी अच्छी प्रगति देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में उद्योगों के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ‘मेक इन इंडिया’ और PLI जैसी योजनाओं के कारण देश में उत्पादन बढ़ा है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
निजी क्षेत्र और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर भी सर्वेक्षण में चर्चा की गई है। सरकार रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दे रही है और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दे रही है। AI के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए IMF ने सलाह दी है कि भारत को तकनीकी बदलावों के अनुसार अपनी श्रम शक्ति को तैयार करना चाहिए, ताकि उत्पादकता बढ़े और रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन में भी सुधार देखा गया है। वर्ष 2024–25 में अनाज उत्पादन लगभग 3320 लाख टन तक पहुंच गया है। खेती की बुवाई में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण आय और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिली है। सरकार किसानों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कृषि क्षेत्र को सशक्त बना रही है।
अंत में, आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 यह दर्शाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है। विकास दर, निवेश, रोजगार, कृषि, उद्योग और महंगाई नियंत्रण जैसे सभी क्षेत्रों में सकारात्मक संकेत मिले हैं। यह सर्वेक्षण 2026–27 के बजट की नींव तैयार करता है और देश को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
निष्कर्ष
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